राम मंदिर चंदे पर उठे सवालों का सच देश के सामने आना जरूरी

 

राम मंदिर चंदे पर उठे सवालों का सच देश के सामने आए- हरीश चौधरी

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और जवाबदेही तय करने की मांग

इंदौर। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी एवं राजस्थान के विधायक हरीश चौधरी ने शुक्रवार को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं तथा उनके नाम पर प्राप्त चंदे और चढ़ावे को लेकर उठे सवालों का पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से जवाब मिलना चाहिए।

हरीश चौधरी ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा के साथ आर्थिक सहयोग दिया था। ऐसे में यदि चंदे, चढ़ावे, व्यय, भूमि खरीद अथवा वित्तीय प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार के आरोप सामने आए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे, ट्रस्ट के प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे विभिन्न प्रश्न तथा मीडिया में सामने आई जानकारियां पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं। उनका कहना था कि यदि सब कुछ पारदर्शी रहा है तो स्वतंत्र जांच से किसी को परहेज नहीं होना चाहिए।

चौधरी ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के गठन और शीर्ष स्तर की व्यवस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा देश की जनता के सामने तथ्यों को रखना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई मुख्यतः निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि शीर्ष स्तर की जवाबदेही तय होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कानूनसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकार वार्ता में हरीश चौधरी ने कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए, कथित अनियमितताओं में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों एवं व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों एवं स्वतंत्र सदस्यों को शामिल करते हुए पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था बनाने की भी मांग की।

हरीश चौधरी ने कहा कि भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए इस विषय पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण नहीं बल्कि पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास अक्षुण्ण बना रहे।

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