जयपुर। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना में करीब 960 करोड़ रुपए के घोटाले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को बुधवार को एसीबी की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। इस दौरान सुबोध अग्रवाल के वकील वेदांत शर्मा और भारत शर्मा ने जेल में उनकी जान को खतरा बताते हुए अलग सेल में रखने की मांग करते हुए कोर्ट में अर्जी लगाई। कोर्ट ने उनकी इस अर्जी पर कोई फैसला नहीं दिया है।
इस मामले में एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि डॉ. सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। पहले उन्हें तीन दिन के रिमांड पर लिया। बादमें फिर दो दिन का रिमांड बढ़ाया गया। अब आज उन्हें जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के दौरान मंगलवार को सुबोध अग्रवाल की तबीयत बिगड़ गई थी,तो स्वास्थ्य जांच करवाई गई। जिसमें उनकी रिपोर्ट्स सामान्य आई है।
एसीबी ने बुधवार को कोर्ट में सुबोध अग्रवाल पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग की,लेकिन कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। उनके वकील का कहना है कि जल जीवन मिशन से जुड़े 37 टेंडर में घोटाले के आरोप लगाए गए हैं। इनमें से चार टेंडर ही सुबोध अग्रवाल के समय के हैं। बाकि 33 टेंडर उनके पीएचईडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहने से पहले के हैं। उनका कहना है कि उनके समय के चार टेंडर को भी उन्होंने खारिज कर दिया, लेकिन सभी टेंडरों का आरोप उन पर लगाया जा रहा है।
इस मामले में एसीबी ने पहले गिरफ्तार दस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी है। इनमें पीएचईडी के इंजीनियर और एक प्राइवेट व्यक्ति शामिल है। एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि अधिशासी अभियंता जितेंद्र शर्मा, अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल और प्राइवेट व्यक्ति संजीव गुप्ता के खिलाफ जारी स्थायी वारंट की तामील के लिए एसीबी की टीमों द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है। इन्हें कोर्ट ने भगौड़ा घोषित किया है। इनकी संपत्ति की सूची कोर्ट में पेश की गई है। अब इनकी संपत्ति कुर्क करने की कवायद की जाएगी।
एसीबी की जांच में सामने आया कि पीएचईडी में टेंडर आवंटन में अनियमितताएं बरती गई। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से टेंडर जारी किए गए। श्रीश्याम ट्यूबवैल कंपनी और श्रीगणपति ट्यूबवैल कंपनी ने इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग कर 900 करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर हासिल किए। इस मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रही है। ईडी ने इस मामले में तत्कालीन पीएचईडी मंत्री डॉ. महेश जोशी सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसीबी ने जांच में पाया कि 50 करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर में साइट निरीक्षण की शर्त जोड़कर गड़बड़ी की गई। इसके तहत टेंडर में शामिल होने वाले ठेकेदारों के लिए साइट निरीक्षण अनिवार्य किया गया। जिससे टेंडर प्रक्रिया की गोपनीयता भंग हुई। इस प्रक्रिया के जरिए करीब 20 हजार करोड़ रुपए के टेंडर की बंदरबांट की गई। इस पूरे मामले में जांच जारी है।