आदिवासी अधिकार, शिक्षा, जल संकट और पर्यावरण पर सूरतगढ़ विधायक ने सरकार को घेरा
जयपुर। सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर ने आज राजस्थान विधानसभा, जयपुर में मांग संख्या 30, 22 एवं 45 पर चर्चा के दौरान प्रदेश एवं क्षेत्र की जनता से जुड़े अनेक गंभीर जनहित मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए जवाबदेही की मांग की। उन्होंने योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन, अनुसूचित जनजाति अधिकारों की
अनदेखी, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, पर्यावरण संकट, पेयजल समस्या तथा किसानों की परेशानियों पर सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाए।
पीएम कुसुम योजना में लक्ष्य से अत्यंत कम उपलब्धि
विधायक ने बताया कि पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 4200 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 तक मात्र 501 व्यक्तियों को ही लाभ मिला — जो लक्ष्य का लगभग 12 प्रतिशत है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के लिए बजट प्रावधान के अपर्याप्त उपयोग को सरकार की विफलता बताया।
नायक समाज के ST प्रमाण पत्र पर प्रशासनिक लापरवाही
उन्होंने कहा कि ई-मित्र पोर्टल पर “नायक” के स्थान पर “नायका” दर्ज किए जाने से विद्यार्थियों को ST प्रमाण पत्र से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक त्रुटि बताते हुए तुरंत संशोधन की मांग की।
धानका समाज के अधिकारों से वंचित करने का आरोप
हनुमानगढ़ में धानका समाज के धरने का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि 1976 के केंद्रीय गजट में शामिल होने और 2019 तक प्रमाण पत्र जारी होने के बावजूद अब प्रमाण पत्र बंद कर दिए गए हैं, जो सामाजिक न्याय के विपरीत है।
घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जातियों के सभी नाम शामिल करने की मांग
विधायक ने मुख्यमंत्री घुमंतू आवास योजना में शामिल जातियों की सूची अधूरी होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बावरी, कंजर, सांसी, नट, भाट, जोगिया, गाड़िया लुहार, जोगी, कालबेलिया, जोगी कनफटा, सिकलीगर, मीरासी, ढाढी आदि जातियों के नाम तो शामिल किए गए हैं, किन्तु इनके उपनाम एवं प्रचलित नाम जैसे सपेरा आदि को शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने मांग की कि घुमंतू, अर्ध-घुमंतू एवं विमुक्त जातियों के सभी नाम, उपनाम एवं स्थानीय प्रचलित पहचान को सूची में शामिल किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजनाओं से वंचित न रहे।
शिक्षा क्षेत्र में अस्थायी भर्ती नीति का विरोध
विधायक ने 5000 अस्थायी पदों पर कम वेतन में टीचिंग एसोसिएट नियुक्त करने के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और नियमित भर्तियां बाधित होंगी। उन्होंने स्थायी भर्ती का कैलेंडर जारी करने तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य में आउटसोर्सिंग समाप्त करने की मांग की।
वन भूमि सरकारी स्कूल, सरकारी भवन एवं बसे लोगों के अधिकारों की अनदेखी
वन विभाग की लापरवाही से वन भूमि पर आबादी बसने के बावजूद पट्टे जारी नहीं किए जा रहे हैं। विधायक ने सरकार से इन परिवारों को कानूनी अधिकार देने की मांग की।
जल संकट, प्रदूषण और बढ़ते तापमान पर सरकार से जवाब
गंगानगर–हनुमानगढ़ क्षेत्र में नहर परियोजनाओं के बावजूद पेयजल और सिंचाई संकट, रासायनिक प्रदूषण, बढ़ते तापमान तथा बीमारियों की घटनाओं पर विधायक ने गंभीर चिंता व्यक्त की और सरकार से ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा।
पर्यावरण संरक्षण पर ठोस नीति की मांग
उन्होंने पौधारोपण का थर्ड पार्टी ऑडिट, किसानों के लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति कोष, पेड़ों की कटाई पर रोक तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यापक नीति बनाने की मांग की।