हत्या के मामले में लॉरेंस को बरी किया, अन्य तीन को करवा

सीकर। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश (एससी/एसटी कोर्ट) ने पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए गुरुवार को सजा का ऐलान किया. करीब आठ वर्ष पुराने इस चर्चित मामले में अदालत ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और यतेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, जबकि मुख्य साजिशकर्ता हरदेवाराम,अरुण और हरेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

अदालत ने मामले में आरोपी सुनील, मुकेश, भानु प्रताप, नरेंद्र, कुलदीप और ओमप्रकाश को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं आरोपी सुभाष बराल अभी फरार चल रहा है. सभी दोषियों को बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया था, जिसके बाद गुरुवार को सजा पर फैसला सुनाया गया.

चुनावी रंजिश में हुई थी हत्या

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह हत्या पंचायत चुनावी रंजिश के चलते की गई थी। घटना 23 अगस्त 2017 की है, जब जुराठड़ा के पूर्व सरपंच सरदार राव पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना दुकान पर बैठे थे.दोपहर करीब 12:40 से 12:45 बजे के बीच एक कार दुकान के सामने आकर रुकी, जिसमें सवार बदमाशों ने सरदार राव पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए.

पृष्ठभूमि और साजिश

सरदार राव वर्ष 2010 से 2014 तक जुराठड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच रहे थे, जिसमें बराल, जुराठड़ा और दुल्हेपुरा गांव शामिल थे। वर्ष 2015 के चुनाव में वे हार गए थे। बाद में सरकारी शिक्षक हरदेवाराम का बेटा संदीप सरपंच बना, लेकिन सरकारी नौकरी लगने के बाद उसने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके चलते सितंबर 2017 में उपचुनाव प्रस्तावित था, जिसमें सरदार राव को मजबूत दावेदार माना जा रहा था.

अभियोजन के अनुसार हरदेवाराम अपने परिवार के सदस्य को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा था और हार की आशंका के चलते उसने अजमेर जेल में बंद सुभाष बराल से संपर्क कर सरदार राव की हत्या की सुपारी दी. पुलिस जांच में सामने आया कि बराल ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से मदद मांगी, जिसके बाद शूटरों ने वारदात को अंजाम दिया.

आठ साल बाद आया फैसला

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई. यह फैसला राज्य भर में चर्चा का विषय रहे इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है.

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