मनरेगा बंद करने पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला

जयपुर। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की मनरेगा योजना को बंद करने की साजिश है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मनरेगा का नाम बदलने समेत विभिन्न बदलावों के विरोध में रविवार को सभी जिलों में मौन सत्याग्रह और उपवास रखे। वहीं, जयपुर में शहीद स्मारक पर मौन सत्याग्रह में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी समेत कई नेता शाम 4 बजे तक मौजूद रहे।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस ने पूरे देश में इस मुहिम को चलाने को आह्वान किया।10 साल मनरेगा को मोदी सरकार ने चलवाया और अब इसका आर्थिक भार का अनुपात 60:40 कर एक तरीके से स्कीम बंद करने की कोशिश है। इन्होंने पहले बॉर्डर एरिया मैनेजमेंट स्कीम भी बंद कर दिया।
रंधावा ने कहा कि मैं केंद्र सरकार से पूछना चाहता हूं कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान, जिनके ऊपर ऊपर कर्ज है वो कभी भी 40% जमा नहीं कर सकते हैं। नए कानून में पहले 40% राज्यों को जमा करने होंगे, उसके बाद केंद्र 60% राशि देगा। इसका मतलब है कि जो गांव के मजदूर हैं उनकी रोजी रोटी उन्होंने बंद कर दी। डोटासरा ने कहा कि हमारी सरकार ने काम का अधिकार सबको दिया था। देश का प्रत्येक नागरिक अपना फॉर्म भर के जमा करता और जिसे काम की जरूरत होती, उसे काम मिलता और जिनको काम नहीं मिलता तो उसको बेरोजगारी भत्ता मिलता था. उस कानून को खत्म करने का काम किया है। अब किसी भी व्यक्ति को देश में मांगने पर काम नहीं मिलेगा।
डोटासरा ने बताया कि राइट टू वर्क जो हमारी सरकार ने दिया वो कानून खत्म हो गया है। नया कानून आ गया है। नए कानून में 40% पैसा स्टेट को देना पड़ेगा और 60% पैसा केंद्र सरकार देगी। पहले के कानून में लेबर का पैसा 100% केंद्र सरकार देती थी और मैटेरियल का पैसा 90% केंद्र सरकार देती तो 10% पैसा राज्य सरकार वहन करेगी। मनरेगा के 5000 करोड़ रुपए राजस्थान के लोगों के बकाया है जो केंद्र सरकार दे नहीं है। राइट टू वर्क का कानून खत्म करने का काम किया है। पहले मनरेगा में पारदर्शिता थी। अब केंद्र सरकार तय करेगी कि नए कानून के मुताबिक कहां पर काम की आवश्यकता और कितना बजट कहां पर देना या नहीं देना है। पहले 365 दिन में से 100 दिन का लोगों का काम का अधिकार था। अब 60 दिन का अधिकार बंद कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मनरेगा ऐसा कानून था, जिसमें लोकसभा में तब जितनी भी विपक्षी पार्टियां थी सबका उसे समर्थन मिला। दुनिया में कोई ऐसी स्कीम नहीं थी, जिसने गांवों का पलायन रोका। बंधुआ मजदूरी से छुटकारा दिलाया। जब कोरोना काल का समय आया जहां जीवन यापन के लिए भारी दिक्कत आ रही थी, तब मनरेगा में रिकॉर्ड लोगों ने काम किया। भाजपा को यही मनरेगा अच्छी नहीं लगी। सरकार को यह कानून वापस लेना पड़ेगा। हम इसे लेकर सदन से सड़क तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।

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