कानून-व्यवस्था, चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था बदहाल, जुली ने बोला हमला

 

*आम जनता के लिए सरकार का मतलब अस्पताल, शिक्षा और पुलिस; भाजपा सरकार तीनों ही मोर्चों पर पूरी तरह फेल: टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा*

*-पहली सरकार जिसके खिलाफ ढाई साल में ही भारी एंटी इंकम्बेंसी*

जयपुर । राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था, चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आम नागरिक के लिए सरकार के अस्तित्व का मतलब तीन मूलभूत स्तंभ होते हैं,अस्पताल, शिक्षा और पुलिस। अगर कोई सरकार अपने नागरिकों को इलाज, बच्चों को सुरक्षित शिक्षा और समाज को भयमुक्त वातावरण नहीं दे सकती, तो उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
आज राजस्थान में भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में ही स्थिति यह हो गई है कि इन तीनों ही क्षेत्रों में सरकार का ‘डिब्बा गोल’ हो चुका है। आमतौर पर किसी सरकार की ऐसी प्रशासनिक विफलता और जन-आक्रोश उसके आखिरी साल में देखने को मिलता है, लेकिन इस सरकार ने मात्र ढाई वर्षों में ही प्रदेश को बदहाली के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजस्थान के सरकारी अस्पताल खुद बीमार हो चुके हैं। अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतें हो रही हैं, जो बेहद हृदयविदारक है। लापरवाही का शिकार डायलिसिस को मजबूर माताएं किडनी ट्रांसप्लांट की गुहार कर रही हैं।
लापरवाही की हद यह है कि मरीजों को गलत ग्रुप का खून चढ़ाकर उनके जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। श्री जूली ने कहा कि सिर्फ व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पतालों का बुनियादी ढांचा भी ढह रहा है; कहीं वार्डों की छतों के प्लास्टर गिर रहे हैं तो कहीं इंजेक्शन तक नहीं मिल रहे, जैसी अभी ही में जानकारी मिली कि 5 माह से एफसीएम इंजेक्शन नहीं मिल रहा जो एनीमिया की शिकार गर्भवती महिलाओं के काम आता है। । जो अस्पताल लोगों को जीवन देने के लिए हैं, वे आज सरकार की अनदेखी के कारण हादसों के केंद्र बन चुके हैं।

शिक्षा विभाग की बदहाली पर तीखा प्रहार करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि जो नौनिहाल देश का भविष्य हैं, वे आज स्कूलों में खौफ के साए में बैठने को मजबूर हैं। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि बच्चों और शिक्षकों को हमेशा यह डर सताता रहता है कि कब उनके सिर पर छत गिर जाए। हमारी बेटियां जान जोखिम में डालकर इन टूटे-फूट भवनों में पढ़ने को विवश हैं, जिसके कारण सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार कम होता जा रहा है। सरकार की गलत नीतियों और राजनीतिक द्वेषतापूर्ण तबादलों के कारण शिक्षा का माहौल पूरी तरह खराब हो चुका है।

प्रदेश की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान में अपराधी बेखौफ हैं और आम जनता डरी हुई है। अलवर में हाल ही में एक युवा की निर्मम हत्या इसका जीवंत और दुखद उदाहरण है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ने अपराध नियंत्रण को लेकर जो बैठक की थी उसका धरातल पर उनका कोई परिणाम नजर नहीं रहा है। मीडिया में आ रही खबरें और भी ज्यादा चिंताजनक और राजस्थान पुलिस की साख को बट्टा लगाने वाली हैं, जिनसे साफ जाहिर होता है कि कुछ क्षेत्रों में अपराधियों और पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत है। इस साठगांठ ने खाकी को शर्मसार कर दिया है।

टीकाराम जूली ने कहा कि इस सरकार की विफलताओं की सूची यहीं खत्म नहीं होती। आज प्रदेश भर में अपनी जायज मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। समाज का हर तबका इस गूंगी-बहरी सरकार से आज़िज़ आ चुका है । सरकार के पास न तो कोई विजन है और न ही जनता की समस्याओं को सुनने की इच्छाशक्ति।

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