खेजड़ी काटना अपराध,राजस्थान में यूसीसी को मंजूरी

जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कैबिनेट की बैठक में  राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दी है। कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि यह संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे नागरिक मामलों में समान एवं पारदर्शी नियम लागू करना है।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्थान ट्रीज प्रोटेक्शन बिल को मंजूरी दी है। इसके तहत खेजड़ी, रोहिड़ा, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर सहित कुल 29 पेड़ प्रजातियों को सूचीबद्ध कर उनके संरक्षण का प्रावधान किया गया है। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर इन पेड़ों को काटने, उखाड़ने या गिराने पर रोक रहेगी। जरूरत होने पर सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने की स्थिति में काटे गए पेड़ों की संख्या से अधिक पेड़ लगाने का प्रावधान रहेगा। जमीन मालिक पौधे लगाने की स्थिति में नहीं है तो निर्धारित राशि सरकार के पास जमा कर सकेगा, जिसका इस्तेमाल पौधारोपण में किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर एक वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने, अथवा दोनों का प्रावधान बताया गया है। अनुमति से असंतुष्ट व्यक्ति को अपील का अधिकार भी रहेगा। सरकार का उद्देश्य गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष संरक्षण, जैव विविधता बचाना और मरुस्थलीकरण को रोकना है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी कल्याण, रोजगार, पदोन्नति, दिव्यांग अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और समान नागरिक संहिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, पीडब्ल्यूडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और मंत्री केके विश्नोई ने दी। कैबिनेट में खास कर UCC बिल को मंजूरी दी गई. इस बिल को सरकार 20 अगस्त से शरू हो रहे विधानसभा सत्र में रखेगी।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री समूह ने बताया कि UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के मान्यता प्राप्त प्रचलित रीति-रिवाजों पर लागू नहीं होंगे। इसके लिए गठित हाई पावर कमेटी की सिफारिशों और अन्य राज्यों के प्रावधानों का अध्ययन किया गया है। विधेयक में सभी धर्मों और समुदायों को अपनी परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करने की स्वतंत्रता रहेगी, लेकिन कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण नहीं कराने पर पहले 10 हजार रुपए तक और लगातार अनदेखी पर 25 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। विवाह या तलाक के पंजीकरण आवेदन पर 15 दिनों में निर्णय का प्रावधान है। आवेदन खारिज होने पर 30 दिनों के भीतर अपील की जा सकेगी और अपीलीय स्तर पर 60 दिनों में निस्तारण का प्रावधान है।

मंत्री पटेल ने कहा कि विधेयक में बहुविवाह पर रोक, विवाह की आयु पुरुष के लिए 21 और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित करने और विवाह और तलाक से जुड़े विवादों के लिए न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान है। धोखे, जबरन सहमति, नपुंसकता या अन्य निर्धारित परिस्थितियों में न्यायालय को विवाह शून्य या रद्द करने का अधिकार होगा। UCC में उत्तराधिकार के मामलों में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने का प्रावधान है। बिना वसीयत मृत्यु होने पर उत्तराधिकार के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। पहली श्रेणी में पति-पत्नी, जीवित बच्चे, मृत बच्चों के पति-पत्नी और बच्चों के माता-पिता को शामिल किया गया है। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन और अन्य निर्धारित रिश्तेदारों को स्थान दिया गया है। मृत्यु के समय गर्भ में मौजूद बच्चा बाद में जीवित जन्म लेता है तो उसे भी उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। लिव-इन संबंध से जन्मी संतान के उत्तराधिकार अधिकारों का भी प्रावधान किया गया है। पटेल ने स्पष्ट किया कि अभी यह विधेयक है. विधानसभा में सदस्यों को इस पर चर्चा और अपनी बात रखने का अधिकार होगा। विधानसभा से पारित होने के बाद ही नियमानुसार इसे कानून का अंतिम रूप मिलेगा।

कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की सूची में अब पुत्रवधू को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र माना जाएगा। बजट घोषणा की अनुपालना में किए गए इस निर्णय से ऐसे परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और आश्रित पुत्रवधू परिवार का भरण-पोषण कर सकेगी। राजस्थान सेवा नियम-1951 में संशोधन करते हुए राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण समाप्ति के दो वर्ष के भीतर त्यागपत्र देने पर केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली का प्रावधान किया गया है. वेतन-भत्तों की वसूली नहीं होगी।

वहीं, यदि कर्मचारी राज्य या केंद्र सरकार के विभाग या उपक्रम में नई नियुक्ति मिलने के कारण पद छोड़ता है तो प्रशिक्षण के दौरान मिले वेतन-भत्तों और प्रशिक्षण व्यय की भी वसूली नहीं होगी। एकल महिला सरकारी कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव अब एक कैलेंडर वर्ष में तीन के बजाय छह चरणों में लेने की सुविधा मिलेगी। सरोगेसी के मामले में सरोगेट मदर को 180 दिन और कमिशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान किया गया है।

कैबिनेट ने पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव में जरूरत के अनुसार दो वर्ष की छूट देने का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का अवसर देना है, जो पूर्व में दी गई अनुभव संबंधी छूट का लाभ नहीं ले पाए। राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम-2015 में संशोधन से वनरक्षक से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल से वनपाल तथा सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता पद पर पदोन्नति का मार्ग खुलेगा।

राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार संशोधन नियम-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सरकारी सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति आरक्षण का काल्पनिक लाभ 30 जून 2016 से दिए जाने का प्रावधान है। इससे लंबे समय से चली आ रही दिव्यांग कर्मचारियों की मांग पूरी होने का रास्ता साफ हुआ है।

जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के राजकीय आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में छात्रावास अधीक्षक के पदों को राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा समान पात्रता परीक्षा नियम-2022 में शामिल किया गया है। परीक्षा स्कीम, न्यूनतम उत्तीर्ण अंक, नेगेटिव मार्किंग और विस्तृत पाठ्यक्रम से जुड़े संशोधनों को भी मंजूरी मिली। इससे छात्रावास अधीक्षक महिला ग्रेड-2 के 254 सहित कुल 470 पदों पर भर्ती का मार्ग प्रशस्त होगा। पहले ये पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *