हाईवे से शराब ठेके हटाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर पीठ के उस अंतरिम आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार को नगर निगम एवं शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों के भीतर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित 1,102 शराब की दुकानों को हटाने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राजस्थान सरकार और शराब लाइसेंस धारकों को बड़ी अंतरिम राहत मिली है।

यह अंतरिम आदेश सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार एवं विभिन्न शराब लाइसेंस धारकों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) पर सुनवाई करते हुए दिया है।

इन याचिकाओं में राजस्थान हाईकोर्ट के 24 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए दलील दी कि हाईकोर्ट ने 500 मीटर की एक कठोर और निरपेक्ष पाबंदी को पुनः लागू कर दिया है, जो स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद स्वयं सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरणों के विपरीत है।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2017, 11 जुलाई 2017 और 23 फरवरी 2018 के अपने बाद के आदेशों में मूल निर्देशों की कठोरता को कम किया था।

इन आदेशों के तहत कुछ परिस्थितियों में दूरी की सीमा को घटाकर 220 मीटर किया गया था तथा नगर निगम क्षेत्रों के भीतर स्थित शराब प्रतिष्ठानों को, राज्य द्वारा तथ्यों के आधार पर किए गए निर्धारण के अधीन, व्यापक निषेध से बाहर रखा गया था।

राज्य सरकार का यह भी तर्क था कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट, अनुच्छेद 141 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित विधि को न तो नजरअंदाज कर सकता है और न ही उसे अप्रभावी बना सकता है।

साथ ही, हाईकोर्ट राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदान किए गए विवेकाधिकार को सीमित नहीं कर सकता।

लाइसेंस धारकों की ओर से पक्ष

विभिन्न शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अधिवक्ता नवीन पहवा ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी।

लाइसेंस धारकों ने तर्क दिया कि नगर निगम क्षेत्रों में स्थित दुकानों को एक समान रूप से राजमार्गों के किनारे स्थित दुकानों के बराबर मानना कानूनन उचित नहीं है, खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं।

इन लाइसेंस धारकों द्वारा दायर याचिकाएं भी राज्य सरकार की याचिका के साथ सूचीबद्ध थीं और सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के संचालन पर रोक लगा दी।

इस रोक के चलते फिलहाल राजस्थान में नगर निगम एवं शहरी क्षेत्रों के भीतर राजमार्गों के किनारे स्थित 1,102 शराब दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने की बाध्यता नहीं रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले में आगे की सुनवाई पक्षकारों द्वारा अपने-अपने अभिवचन (काउंटर और रीजॉइंडर) दाखिल किए जाने के बाद की जाएगी। तब तक के लिए हाईकोर्ट का आदेश स्थगित रहेगा।

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