जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव की तैयारियां के तहत 13 अगस्त, गुरुवार को 309 नगरीय निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इसके साथ ही ये तस्वीर साफ हो जाएगी कि किस निकाय में प्रमुख पद सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या ओबीसी वर्ग के लिए होगा। इसके बाद 17 और 18 अगस्त को निकायों के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जानी है। इसके बाद 18 या 19 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही पूरे राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी।
निकाय प्रमुखों के लिए 13 अगस्त की स्वायत्त शासन विभाग के सभागार में सुबह 10:30 बजे लॉटरी निकाली जाएगी। महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों का आरक्षण तय होने के साथ ही लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे संभावित दावेदारों की तस्वीर भी स्पष्ट हो जाएगी। विभाग ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को अपने अधिकृत प्रतिनिधि भेजने के लिए आमंत्रित किया है।
राज्य में कुल 309 नगरीय निकाय हैं। इनमें 10,245 वार्ड हैं।
वहीं राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 14,403 है। वहीं
457 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषद हैं। निकाय चुनाव जहां सितंबर में होने हैं। वहीं अक्टूबर -2 नवंबर में पंचायत चुनाव होने हैं।
डीएलबी डायरेक्टर जूईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने बताया कि सभी राजनीतिक दलों को भी लॉटरी प्रक्रिया में प्रतिनिधि भेजने के लिए आमंत्रित किया है। इसके लिए आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और भारत आदिवासी पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों को सूचना भेजी जा चुकी है।
इसके बाद 17 अगस्त को नगरीय निकायों और 18 अगस्त को पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रस्तावित है। जिला स्तर पर कलक्टरों के माध्यम से वार्डों का आरक्षण तय होगा। वहीं पंचायत चुनावों के लिए सरपंच और वार्ड पंच के पदों की लॉटरी उपखंड स्तर पर कराई जाएगी। इन तारीखों को लेकर औपचारिक आदेश अभी जारी होना बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार तेज कर दी गई हैं। कुल मिलाकर एक सप्ताह में राजस्थान की चुनावी तस्वीर साफ हो जाएगी। पहले 13 अगस्त को निकाय प्रमुखों के पदों का आरक्षण, फिर वार्डों की आरक्षण लॉटरी और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी। इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव का औपचारिक बिगुल बज जाएगा। खास तौर पर पार्षद, सभासद, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि बनने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर आरक्षण लॉटरी पर टिकी है।
2019 की पिछली आरक्षण प्रक्रिया और इस बार की चुनावों में देरी के चलते लॉटरी सात साल बाद हो रही है। वर्ष 2019 में प्रदेश के 193 नगरीय निकायों के 7280 वार्डों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली गई थी। उस समय 18 सितंबर को वार्डों और 21 अक्टूबर को मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण का निर्धारण हुआ था। अब निकायों की संख्या बढ़कर 309 और वार्डों की संख्या 10245 हो चुकी है। ऐसे में 13 अगस्त की लॉटरी केवल आरक्षण तय करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि करीब सात साल बाद होने जा रहे निकाय चुनाव की राजनीतिक दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव भी होगी।