जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने तबादला आदेशों की कियान्विति पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों के तबादला आदेश से जुड़ी 468 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का आदेश दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने विभागों में अभ्यावेदन पेश करने को कहा है। इन अभ्यावेदनों को पन्द्रह दिन में तय करने के आदेश दिए हैं। तब तक तबादला आदेशों के कियान्वियन पर रोक रहेगी। अदालत ने तबादला नीति बनाने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज आलोक शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठन के आदेश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश 468 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने रिटायर जज की अध्यक्षता में राज्य के महाधिवक्ता और मुख्य सचिव को शामिल किया है। अदालत ने कहा है कि यह कमेटी दो माह में तबादला नीति का फ्रेमवर्क तैयार करे। याचिकाओं में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी, अशोक बसल, हरेन्द्र नील और गिरिराज राजोरिया सहित अन्य वकीलों ने विभिन्न तबादला आदेशों को अलग-अलग आधारों पर चुनौती दी थी।
इस दौरान अदालत के सामने आया कि तबादला नीति नहीं होने के चलते अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादला आदेश जारी होने पर अदालतों में तबादलों को चुनौती देते हुए बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर होती हैं। इस पर अदालत ने तबादला नीति की मंशा जताते हुए पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी गठन के आदेश दिए हैं। वहीं अदालत ने याचिकाकर्ताओं को पन्द्रह दिन की राहत देते हुए विभागों को कहा है कि इस अवधि में उनके अभ्यावेदनों को तय करे।