नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को पश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में देश भर में ईंधन, बिजली और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।
इस समय पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में व्यवधान पैदा होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। भारत, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारतीय नागरिकों को किसी भी तरह की कमी या कीमतों में अचानक उछाल का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पीएम मोदी ने 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे शांति, धैर्य एवं लोगों में अधिक जागरूकता के जरिये निपटने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।
मोदी ने कहा था, “यह पता लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों से हम कैसे पार पा सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया के कई नेताओं से बात की है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इससे गुजरने की अनुमति दी है। इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया है।