जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने नीट मामले में अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रकोष्ठ और विभाग के कार्यकर्ता अच्छा काम कर रहे हैं। कांग्रेस के नेता भी ऐसे ही काम करते तो अच्छा होता।
डोटासरा ने सोमवार को चिकित्सा प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में कहा कि मैं यह बात कहने से अपने आपको नहीं रोक पा रहा हूं कि कांग्रेस में हम विधायक-मंत्री और सांसद बन जाते हैं और उसके बाद जमीन से 2 फीट ऊपर चलने लग जाते हैं। दिक्कत वहीं से खड़ी हो जाती है। जितने भी कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता हैं वो केवल राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे क्या बोलते हैं, उस बात को जनता के सामने ले जाएं तो नरेंद्र मोदी का पता भी नहीं चलेगा कि कहां गए। जिन सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है, वो अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा, कांग्रेस संविधान को मजबूत करने के लिए क्या काम कर रही है, लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। देश के निर्माण में कांग्रेस का क्या योगदान है, लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए कांग्रेस ने क्या योजना चलाई थी। यह 10-12 बातें ही अगर कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी जनता के बीच लेकर जाएं तो भाजपा के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा।
पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि देश में मनमोहन सिंह के समय मेडिकल स्ट्रक्चर को मजबूत किया गया था। हर जिलों में जो आज मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, वो मनमोहन सिंह की देन है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में राइट टू हेल्थ, चिरंजीवी योजना, आरजीएचएस जैसे कई मजबूत कदम उठाए गए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने सब बर्बाद कर दिया है। लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। प्राइवेट अस्पतालों का 3000 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। चिकित्सा मंत्री सदन में कहते हैं कि राइट टू हेल्थ की राजस्थान में कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि नीट का पेपर लगातार 3 बार 2024-2025 और 2026 में पेपर आउट हुआ। उन्होंने कहा कि चार दिन तक धर्मेंद्र प्रधान सामने ही नहीं आए। राजस्थान के लोगों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को बाकायदा प्रमाण दिया कि पेपर आउट हुआ, तब जाकर एजेंसियां हरकत में आईं। राजस्थान की एसओजी ने दो दिन तक ईमानदारी से काम किया, लेकिन उसके बाद उन पर भी दबाव आ गया। डोटासरा ने कहा कि 23 लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे लेकर एक ट्वीट तक नहीं किया है। होना यह चाहिए था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो, लेकिन सब चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार की ओर से एनटीए में लोगों की नियुक्ति की गई थी। इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
डोटासरा ने कहा कि आज देश में एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं के पीछे ईडी लगा दी जाती है, जिन राज्यों में चुनाव होते हैं वहां पर ईडी पहुंच जाती है। हाल ही में बंगाल में ईडी पहुंची थी। उससे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम जैसे राज्यों में ईडी गई थी। उन्होंने कहा कि इस सरकार से केवल एक ही आदमी है जो नहीं डरता है। उसका नाम राहुल गांधी है। राहुल गांधी को डराने की कोशिश की गई थी। 58 घंटे तक ईडी ने उनसे बुलाकर पूछताछ की।
चिकित्सा प्रकोष्ठ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि आज देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं सोच सकता है। जो लोग आज तटस्थ हैं, उसको भी समय याद रखेगा, क्योंकि इस दौर में अगर कोई यह सोचकर नहीं बोल रहा है कि हमें क्या करना है, उसकी बात इतिहास में दर्ज होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को डराया धमकाया जा रहा है, या तो जेल जाओ या बीजेपी में, तो लोग जेल जाने की बजाय भाजपा में जा रहे हैं।
जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। प्रधानमंत्री ने जिस शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ भाषण दिया था, उसे सीएम बना दिया। असम में हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ बोले थे, उसे सीएम बना दिया और अजीत पवार के खिलाफ 62000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तो उसे डिप्टी सीएम बना दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ तो पेट्रोल-डीजल बचाने और विदेश दौरा नहीं करने की बात करते हैं और स्वयं ही पांच देशों की यात्रा पर निकल जाते हैं।