जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने रामगढ़ बांध के अतिक्रमण हटाने को लेकर सरकार के कई विभागों की सुस्ती को लेकर गहरी नाराजगी ही नहीं जताई, बल्कि कई टिप्पणियां करते हुए चेतावनी भी दी है। राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण के मामले में शुक्रवार को जयपुर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को कड़ी फटकार लगाई।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.पी. शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने जिला कलेक्टर को आदेश दिया हैं कि इस मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए, जिसमें रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले सभी व्यक्तियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हों। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि रिपोर्ट में यह भी बताया जाए कि किसके फार्म हाउस बने हुए हैं, किसके होटल संचालित हो रहे हैं, कौन रेस्टोरेंट चला रहा है और किसने किस प्रकार का अतिक्रमण किया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि “चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसका नाम रिपोर्ट में होना चाहिए।”
सुनवाई के दौरान सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि “आप लोग कब तक मीटिंग में चाय-बिस्किट खाकर मामले निपटाते रहेंगे? अधिकारियों को मौके पर जाकर फिजिकल सर्वे करना चाहिए।” कोर्ट की इस टिप्पणी ने सरकारी मशीनरी की निष्क्रियता और केवल बैठकों तक सीमित कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
मामले में न्यायमित्र अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि रामगढ़ बांध का मुख्य जल स्रोत बाणगंगा नदी और उसकी सहायक नदियां थीं, लेकिन प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित होने और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण अब पानी बांध तक नहीं पहुंच पा रहा।
इस पर हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि विराटनगर से रामगढ़ बांध तक पानी पहुंचाने वाली बाणगंगा, ताला, रोड़ा और माधवेणी नदी के बहाव क्षेत्र से सभी अतिक्रमण हटाए जाएं, ताकि प्राकृतिक जल प्रवाह बहाल हो सके। खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट और बहाव क्षेत्र में किसी भी स्थिति में सबमर्सिबल पंप का उपयोग नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूजल का अवैध दोहन हो रहा है, जिसे हर हाल में रोका जाना आवश्यक है। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से पूरे क्षेत्र का सर्वे कराया जाएगा। सरकार ने कहा कि यदि फिजिकल सर्वे किया जाता है तो अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लगाए जाते हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि सिर्फ तकनीकी सर्वे पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है।
सुनवाई के दौरान जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित रहे। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त निर्धारित करते हुए तब तक अतिक्रमणकारियों के नाम सहित विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।