जयपुर। राजस्थान विधानसभा का सत्र डेढ़ दिन भी नहीं चल सका और अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पहले दिन जहां विपक्षी सदस्यों को अंदर नहीं आने दिया गया वहीं दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मानसून सत्र में दूसरे दिन शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे और बॉयकॉट के बीच सरकार ने राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC BILL) विधेयक-2026 सदन में पेश किया। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। विधेयक को चर्चा से पहले विधानसभा में पुरस्थापित किया गया। अब इस पर तत्काल चर्चा नहीं होगी, बल्कि विधानसभा के मौजूदा सत्र के दूसरे चरण में चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया होने की संभावना है। विधेयक को गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के जरिए सदन में रखना था, लेकिन विधेयक से संबंधित कागजात उनके पास नहीं होने से संसदीय मंत्री जोगाराम ने इसे सदन में रखा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
नियमानुसार किसी विधेयक को चर्चा के लिए लेने से पहले सदस्यों को तय समय दिया जाता है। ऐसे में आज UCC विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। सरकार से इसे सदन में पुरस्थापित किए जाने के बाद अब आगामी चरण में इस पर विस्तृत चर्चा होगी। सत्ता पक्ष का कहना था, विधेयक पर सभी पक्षों को बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। कांग्रेस विधायक दल के हंगामे और वॉकआउट को लेकर मंत्री पटेल ने कहा कि राजस्थान की आठ करोड़ जनता को मालूम होना चाहिए कि विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में हुई बैठक में जो बातें और सहमति तय हुई थी, कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता उसमें मौजूद नहीं थे। अध्यक्ष के कक्ष में तय बातों को कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से अलग तरीके से प्रस्तुत किया।
पटेल ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल ने हंगामा कर सदन से वॉकआउट किया, जबकि शून्यकाल में कांग्रेस विधायकों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का पूरा अवसर दिया जाना था। उन्होंने आरोप लगाया, कांग्रेस के भीतर खींचतान का असर विधानसभा की कार्यवाही पर दिखाई दे रहा है। पटेल ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि क्या कांग्रेस विधायक दल को सदन में आने से रोका गया था? उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता के मुद्दे उठाने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करनी चाहिए।
विधानसभा गेट से प्रवेश को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच विवाद पर अध्यक्ष देवनानी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आसन की ओर से प्रवेश की व्यवस्था पहले से तय है। वाहन से आने वाले सदस्यों के लिए अलग व्यवस्था है, जबकि पैदल आने वाले विधायक गेट नंबर 6 से प्रवेश कर सकते हैं। यह गेट कल भी खुला था और आज भी खुला है। सामूहिक रूप से गेट से आने की अनुमति न पहले थी और न अब है। गेट से पहले क्या बात हुई, यह सरकार और विपक्ष के बीच का विषय है। विधानसभा के गेट पर चढ़कर अंदर आने का प्रयास सुरक्षा और नियमों की दृष्टि से अवांछनीय है। अध्यक्ष ने पूरे मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से संभालने के लिए सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, सदन में सभी सदस्यों को अपने मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए नियमों और संसदीय मर्यादाओं का पालन जरूरी है। सरकार की जिम्मेदारी है कि विपक्ष के उठाए मुद्दों का जवाब दे. देवनानी ने कल और आज की घटनाओं पर पीड़ा जताते हुए सभी दलों से सदन की कार्यवाही गरिमापूर्ण तरीके से चलाने की अपील की. इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
विपक्ष के विरोध पर देवनानी ने कहा कि मौजूदा सत्र में विधायी कार्यों के साथ वित्तीय मंजूरियां भी की जानी हैं. यह सदन के कामकाज का आवश्यक हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। इसी बीच राजस्थान माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक-2026 भी सदन में रखा गया। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने यह संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में मामला उठाते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों को अंदर नहीं आने देना, इसे लेकर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर व्यवस्था नहीं दी और प्रश्न काल में विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा। ऐसे में कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। बाद में बाहर आकर विपक्षी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया और मटके फोड़े। नारेबाजी की।