श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में ज़हरीली हवा और दूषित पानी पर सरकार फैला रही है भ्रम

 

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में ज़हरीली हवा और दूषित पानी पर सरकार इनकार की मुद्रा में, संसद में भ्रामक जवाब देने का आरोप: सांसद कुलदीप इंदौरा

नई दिल्ली। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ से सांसद कुलदीप इंदौरा ने लोकसभा में क्षेत्र में वायु एवं जल प्रदूषण को लेकर पूछे गए अपने प्रश्न के उत्तर पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। सांसद ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि केंद्र सरकार न केवल इस गंभीर समस्या को स्वीकार करने से इनकार कर रही है, बल्कि संसद के पटल पर ज़मीनी सच्चाई से बिल्कुल उलट जानकारी प्रस्तुत कर रही है।

सांसद ने कहा कि सरकार के जवाब में यह दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्रमशः 152 और 125 रहा, जो “मध्यम श्रेणी” में आता है। जबकि वास्तविकता यह है कि पिछले एक वर्ष में कई बार इन दोनों ज़िलों में AQI का स्तर 500 से ऊपर दर्ज किया गया है, जो “गंभीर” और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित मीडिया रिपोर्टों में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ को दुनिया के शीर्ष 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया है, फिर भी सरकार आंख मूंदकर इन तथ्यों को नकार रही है।

सांसद कुलदीप इंदौरा ने कहा कि वायु प्रदूषण के साथ-साथ जल प्रदूषण की स्थिति और भी भयावह है। क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में दूषित पानी पीने को लोग मजबूर हैं। कैंसर, किडनी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों से लोगों की असमय मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार अपने उत्तर में यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि नहरों और जल स्रोतों का पानी पीने योग्य है या उपचार के बाद सुरक्षित है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पानी वास्तव में सुरक्षित है, तो फिर इन बीमारियों का असामान्य रूप से बढ़ता ग्राफ किसकी जिम्मेदारी है?

इंदौरा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार आंकड़ों के खेल में उलझकर जनता की पीड़ा को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लोगों को इस तरह ज़हरीली हवा और दूषित पानी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

सांसद ने कहा कि वे इस पूरे मामले को संबंधित मंत्रालय के समक्ष फिर से मजबूती से उठाएंगे और आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर लगातार इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा और शुद्ध पेयजल मिलना क्षेत्र के लोगों का मौलिक अधिकार है और सरकार इससे पीछे नहीं हट सकती।

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