जोधपुर एम्स में रेजिडेंट आत्महत्या प्रकरण ने तूल पकड़ा,हड़ताल की घोषणा

जोधपुर। जोधपुर एम्स में एक रेजिडेंट डॉक्टर के आत्महत्या प्रकरण में बुधवार को मृतक डॉ राज नरेश यादव के परिजनों ने एम्स निदेशक डॉ गोवर्धनदत्त पुरी से कहासुनी हो गई। दूसरी ओर मृतक डॉक्टर को सामूहिक श्रद्धांजलि देने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स ने निदेशक को ज्ञापन सौंपकर माफी मांगे जाने, परिजनों को आर्थिक मुआवजा, निदेशक का इस्तीफा की मांग की है। देर शाम एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर और स्टूडेंट्स ने परिसर में कैंडल मार्च निकाला।

इससे पहले एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स ने 2 घंटे का कार्य बहिष्कार किया। शव के जाने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर एम्स के पोर्च में एकत्र हो गए। उन्होंने निदेशक को ज्ञापन सौंप अपनी मांगे रखी। जिनके पूरे नहीं होने तक हड़ताल जारी रखने की बात कही। हड़ताल के दौरान सिर्फ इमरजेंसी के मरीज देखे जाएंगे और इन्हीं के आवश्यकतानुसार ऑपरेशन होंगे। नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। केवल आपातकालीन ओपीडी सेवाएं चलेगी। इस पूरे मामले पर एम्स की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर और अन्य स्टूडेंट्स ने एकत्र होकर अपने मुंह पर पट्टी बांधी और चुपचाप विरोध करते हुए बैठ गए। उनका कहना है कि इस घटना ने पूरे संस्थान समुदाय के बीच गहरा दुख और चिंता पैदा कर दी है। रेजिडेंट और छात्रों के लिए काम करने की स्थितियों, ड्यूटी के घंटे, कार्यभार को लेकर गंभीर चिंताए सामने आई हैं। डा राज नरेश यादव ने मंगलवार को ऑन ड्यूटी आत्महत्या की थी। जिसके बाद से एम्स में ड्यूटी के घंटों को लेकर विवाद छिड़ गया।
एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स ने आरोप लगाया कि हमारे यहां ऐसे हालात हैं कि एक रेजिडेंट को 36-36 घंटे रेगुलर ड्यूटी दी जा रही है। वह अपने आप को कैसे मेंटेन करे, जब हम बात करते हैं, तो कहते हैं कि डॉक्टर की संख्या पर कैप लगी हुई है, लेकिन यहां मरीजों की संख्या में कोई नियंत्रण नहीं है। जिसके चलते डॉक्टर बेहद दबाव में हैं। इस घटना का सबसे बड़ा कारण भी यही है। फिलहाल ओपीडी ब्लॉक के बाहर प्रेसिडेंट डॉक्टर और स्टूडेंट प्रबंधन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

रेजीडेंट्स की मांग है कि घटना के संबंध में संस्थान प्रशासन सार्वजनिक माफी मांगे और अपनी विफलता स्वीकार करे। साथ ही घटना जैसी परिस्थितियों और पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पारदर्शिता के साथ साझा करें। इसी के साथ उचित वित्तीय मुआवजा (5 करोड़ रुपए) और सभी संभावित संस्थागत सहायता मृतक के परिवार को सभी लागू लाभों, बकाया, बीमा और अन्य के साथ सहायता के साथ प्रदान की जानी चाहिए।
वहीं घटना की जवाबदेही ली जाए और कार्यकारी निदेशक इस्तीफा दें। साथ ही रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन और स्टूडेंट यूनियन को औपचारिक रूप से संस्थान द्वारा रेजिडेंट के प्रतिनिधि निकाय के रूप में मान्यता दें,जिसमें आरडीए और संस्थान प्रशासन के बीच नियमित बात हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *