जयपुर। किसी समय भाजपा के नंबर वन श्रेणी के नेता माने जाने वाले राजेंद्र राठौड़ की इन दोनों क्या हालत हो गई है, कि पहले उनके बेटे को RCA चुनाव से बाहर किया गया और अब पंचायत चुनाव का टिकट भी आसानी से नहीं दिया जा रहा और लिस्ट में उनका नाम होल्ड पर रख दिया गया। ऐसे में राजेंद्र राठौड़ का गुस्सा फट पड़ा और वह बैठक छोड़कर जाने लगे, तो खुद मुख्यमंत्री को रोकना पड़ा।
पंचायत चुनाव के लिए भाजपा में टिकटों की रायशुमारी के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ उस समय नाराज हो गए,जब भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में राठौड़ चूरू जिला परिषद के लिए अपने बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और बहू के लिए टिकट मांग रहे थे। संगठन की ओर से कहा गया कि बहू का टिकट तय कर देते हैं और बेटे का टिकट होल्ड पर रखते हैं, जिस पर राठौड़ भड़क गए। गुस्साए राठौड़ ने कहा कि बेटे का नाम आरसीए में भी होल्ड पर रख लिया गया था,आखिर कब तक होल्ड पर रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगह एक ही परिवार को तीन-तीन टिकट दिए गए हैं, तो संगठन को उन्हीं से क्या समस्या है।
बताया जा रहा है कि राठौड़ इतने नाराज हो गए कि बैठक छोड़कर जाने लगे। बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्थिति संभाली और उनसे कहा कि वे वरिष्ठ नेता हैं और उनकी राय को महत्व दिया जाएगा। बैठक के बाद राठौड़ बिना कुछ बोले रवाना हो गए।
बैठक में संगठन की राय थी कि शेखावाटी अंचल भाजपा के लिए आसान नहीं है और एक ही परिवार को टिकट देने से इलाके में नाराजगी हो सकती है। इस पर राठौड़ ने कहा कि उन्हें पता है कि अपने क्षेत्र में चुनाव कैसे जीतना है और वे दूसरी जगहों पर जाकर भी चुनाव जिता चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक नाराजगी में उन्होंने यहां तक कह दिया कि संगठन अपनी मर्जी से चुनाव लड़ा ले और जितवा ले।
मजेदार बात यह है कि भाजपा ने पंचायत चुनाव के लिए सात संभागों में चुनाव संचालन समितियां बनाई है, उसमें राजेंद्र राठौड़ को उदयपुर संभाग की समिति में जगह दी गई है।
उल्लेखनीय है कि पराक्रम सिंह राठौड़ ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था, लेकिन बाद में नाम वापस लेना था।
राजेंद्र राठौड़ से भाजपा की क्या दुश्मनी है,बेटे का टिकट रोक दिया