बीकानेर। बीकानेर नगर निगम में आखिरकार कांग्रेस अपना महापौर बनाने में ही सफल नहीं रही,बल्कि भाजपा खेमे को तोड़कर अपने खेमे में लाने में भी सफल रही है। महापौर चुनाव में कुल 80 पार्षदों ने मतदान किया। इसमें से कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने 50 वोट हासिल कर भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को शिकस्त दी, जिन्हें 30 वोट मिले। अनिल कल्ला को कांग्रेस के पार्षदों से 8 वोट अधिक मिले, जिससे भाजपा खेमे में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था और मतदान के दौरान उन्हें अपने साथ भी लेकर पहुंची थी, लेकिन इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को 30 वोट ही मिल सके।
महापौर के रूप में निर्वाचित होने के बाद अनिल कल्ला ने कहा कि उनका लक्ष्य बीकानेर नगर निगम को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाना है। उन्होंने शहर की स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता बताया। कल्ला ने कहा कि निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के साथ शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चुनाव परिणाम ने कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के समीकरणों को भी चौंका दिया. निगम चुनाव में कांग्रेस के 42 पार्षद जीतकर आए थे और उसके पास स्पष्ट बहुमत था। इसके बावजूद चुनाव से पहले कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन मतदान के बाद सामने आए आंकड़ों ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी। कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला को अपने 42 पार्षदों से आठ वोट अधिक मिले, जिनमें चार निर्दलीय उनके साथ थे और बाकी चार वोट भाजपा से क्रॉस वोटिंग हुई।
नगर निगम चुनाव में भाजपा के 27 पार्षद जीतकर आए थे। इसके बाद भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों को अपने खेमे में शामिल करने का दावा किया था। तीन दिन पहले भाजपा की ओर से इन निर्दलीय पार्षदों के साथ फोटो भी जारी किए गए थे। महापौर चुनाव के दिन भी भाजपा नेता इन निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ मतदान केंद्र तक लेकर पहुंचे। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को कुल 30 वोट ही मिल सके यानी भाजपा के 27 निर्वाचित पार्षदों और उसके साथ होने का दावा किए गए सात निर्दलीयों की संख्या 34 होती है, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 30 वोट ही मिले। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी को 50 वोट मिले। ऐसे में मतदान के नतीजों ने भाजपा के खेमे में हुई क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर भी क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जा रही थी। पार्टी के 42 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन मतदान का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा। अनिल कल्ला ने बहुमत के आंकड़े 41 से 9 वोट अधिक हासिल करते हुए 50 वोट प्राप्त किए। कांग्रेस के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी ने दस साल बाद बीकानेर नगर निगम में सत्ता में वापसी की है। अब महापौर पद पर भी कांग्रेस का कब्जा हो गया है।
पूर्व मंत्री बीडी कल्ला ने महापौर चुनाव के परिणाम पर कहा कि सरकार की ओर से प्रशासन और पुलिस के दम पर प्रयास तो बहुत किए गए, लेकिन जनता का जनादेश कांग्रेस के पक्ष में था। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव के परिणाम के बाद महापौर चुनाव में भी कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के महापौर बनने के साथ ही अब शहर की नई निगम सरकार के सामने विकास, सफाई, सीवरेज, सड़क और जल निकासी जैसी स्थानीय समस्याओं को लेकर काम करने की चुनौती होगी।