जोजरी नदी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त,कहा – सीआरपीएफ को सौंपना पड़ेगा इलाका

जोधपुर / नई दिल्ली । जोधपुर की जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों को न कही बताया है और कहा है कि अगर नहीं कर सकते तो फिर पूरा क्षेत्र सीआरपीएफ को सौंप देते हैं।
दरअसल औद्योगिक प्रदूषण की चपेट में आई जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार नाराजगी जताता रहा है और बेहद सख्त रुख अपना रहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संदीप मेहता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सरकार के वकील से कहा कि अभी तक प्रदूषित पानी क्यों आ रहा है? बिना रुके यह चल रहा है।
यह तथ्य हम आपको ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के आधार पर बता रहे हैं। अगर आपके अधिकारी यह रोक नहीं पा रहे हैं तो हम इस पूरे 50 किमी क्षेत्र को सीआरपीएफ के हवाले कर देंगे। हम इसको लेकर बहुत गंभीर हैं। 20 मिलियन लोगों के जीवन का सवाल है। यह आपको समझना चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को वापस नियत की गई है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि एक टास्क फोर्स बनाई गई है जो निगरानी कर रही है। समिति द्वारा उद्योग बंद करने के बाद भी अवैध फैक्ट्रियां दोबारा शुरू हो गई हैं। इस पर जस्टिस मेहता ने और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा- आंकड़े बताओ, कितनी मशीनरी हटाई गई। कितनी सील की गई और अवैध रूप से दोबारा क्यों खुल रही हैं ?
इधर प्रदूषित जोजरी क्षेत्र में रहने वाले और इस मामले को लेकर काम कर रहे श्रवण राम पटेल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फैक्ट्रियां बंद होने से हम इस इलाके में सांस ले पा रहे हैं। इस प्रदूषण ने हमारी जमीनों को बंजर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट लगातार हालात सुधारने के लिए निर्देश दे रहा है। बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर सरकार के अधिकारी प्रदूषण नहीं रोक पा रहे हैं तो सीआरपीएफ को लगाया जाएगा।

जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण और राजस्थान के नदी तंत्र की बदहाल स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट 7 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला दिया था. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने फैसले में नदियों के प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को कई बड़े निर्देश दिए।

कोर्ट ने जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र के संरक्षण के लिए इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप बनाने को कहा है. साथ ही राजस्थान के लिए स्वतंत्र और पर्याप्त अधिकारों से लैस रिवर कमीशन/रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी गठित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया था कि नदियों और पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाले उद्योगों, अधिकारियों और सांठगांठ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा. इसी आदेश के तहत नियमित सुनवाई चल रही है।

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