सीकर में छाई छात्रों की गूंज

सीकर । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के शिक्षा न्याय संवाद अभियान,छात्रों की गूंज जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में आयोजित हुआ।
शिक्षा न्याय समान अभियान छात्रों की गूंज कार्यक्रम आज जिला कांग्रेस कार्यालय में संपन्न हुआ जिसमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कोटा में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम राहुल गांधी ने प्रारंभ किया है, जिसमें देश की शिक्षा व्यवस्था की चर्चा की गई है। नेता विपक्ष  राहुल गांधी ने यह प्रश्न उठाया कि आज की शिक्षा व्यवस्था में सभी लोग चार या पांच क्षेत्र में ही अपना करियर बनाने के लिए सोचते हैं, जिसमें मूल रूप से माता-पिता की सोच होती है कि बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील या प्रशासनिक सेवा में जाए और इसके साथ सशस्त्र बल में जाने की सोच रहती है। इन्हीं क्षेत्रों में जाने की सोच अधिकांश छात्रों की रहती है, किंतु इसके अतिरिक्त अन्य क्षेत्र में भी करियर बनाया जा सकता है, किंतु इन चार या पांच क्षेत्रों में अपना भविष्य तलाशने के लिए बच्चे एक साल में तीन-साढे तीन लाख रुपए तक कोचिंग की तैयारी पर खर्च कर देते हैं।

जो भी छात्र चाहे नीट के हो, आईआईटी की हो, वकील बनने के लिए क्लेट की हो, या प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए तैयारी कर रहा हो। 2 साल की तैयारी में 7 लाख के आसपास तो तैयारी व कोचिंग में ही खर्च हो जाते हैं। राहुल गांधी का यह कहना है कि इन पांच एग्जाम की तैयारी में जो देश के 90% युवा अपना ध्यान केंद्रित करते हैं और तैयारी कर रहे हैं। उनका कुल खर्च 1 साल का जोड़ा जाए, तो यह राशि है 3.30 लाख करोड़ यदि नीट की तैयारी कर रहे 22 लाख बच्चों द्वारा की गई खर्च को जोड़ें, तो वह कुल खर्च 125000 करोड़ रूपया हो जाता है। किंतु जो चुने जाते हैं उनकी संख्या देखी जाए तो 3000 में से एक बच्चे का प्रशासनिक सेवा के लिए सिलेक्शन होता है। नीट की तैयारी करते हैं और नीट की तैयारी करने वाले बच्चों में 3000 में से 180 बच्चों सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए चुने जाते हैं। यदि निजी मेडिकल कॉलेज में कोई बच्चा जाता है, तो 1 साल की फीस ही एक करोड रुपए के आसपास हो जाती है ,जो कि मध्यम वर्गीय समाज के परिवार को देना मुश्किल है। इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे 3000 बच्चों में से 180 बच्चों के लगभग की सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाते हैं, लेकिन इंजीनियरिंग में स्नातक 80% युवाओं को नौकरी व रोजगार नहीं मिल रहा।

देश की आज स्थिति हो गई कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या लैब असिस्टेंट की नौकरी निकलती है तो उसमें जो आवेदन आते हैं। उसमें नीट से पढ़े हुए युवाओं के भी प्रार्थना पत्र पाए जाते हैं। सभी युवा इन्हीं क्षेत्रों में प्रवेश पाने के लिए तैयारी करते हैं, क्योंकि हमारा देश का शिक्षा तंत्र सही नहीं चल रहा है, जबकि अन्य देशों में छात्रों के लिए अपने भविष्य का करियर चुनने के लिए 200 से 300 क्षेत्र में करियर बनाने की संभावनाएं खुली होती हैं, यदि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था भी हमारे युवाओं को इतनी अधिक करियर के ऑप्शन दे, तो गरीब का बेटा कभी बेरोजगार नहीं रहेगा इस ओर कार्य करना होगा यदि युवाओं को समय पर रोजगार नहीं मिलेगा तो उनमें निराशा व्याप्त होगी, क्योंकि माता-पिता ने कर्ज लेकर मकान दुकान अथवा खेत बेचकर पढाया है। ऐसी निराशा से युवाओं को निकालने के लिए शिक्षा व्यवस्था को सुधारना होगा। इतना खर्चा करके जब मां-बाप अपने बच्चों को पढ़ाते हैं और नीट की तरह पेपर आउट हो जाए इससे बड़ा धक्का नहीं हो सकता। देश भर में अनेक बच्चों ने आत्महत्या कर ली लेकिन जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है इन सबके लिए जिम्मेदार हमारा खराब शिक्षा तंत्र है। श्री डोटासरा ने कहा कि हमें इस प्रकार का शिक्षा तंत्र बनाना होगा कि किसी युवा के मन में निराश ना हो किसी मां-बाप को यह ना लगे कि हमारा सब कुछ लुट गया लेकिन बच्चा कुछ बन नहीं पाया या उसे रोजगार नहीं मिला इसलिए यह छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजन किया गया है इसका एक ही मकसद है कि हमारे भारतवासी जो शिक्षा तंत्र की खराबी को समझ रहे हैं वह हमारे शिक्षा तंत्र जो रोजगार देने वाला बन सके इस हेतु अपनी राय प्रदान करें।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने कहा कि पेपर लीक के चलते 22 लाख छात्रों ने मानसिक तनाव सहा 22 छात्रों ने इस दौरान आत्महत्या की, मोदी सरकार छात्रों की आवाज नहीं सुनना चाहती आज देश का छात्र अपने अधिकारों की मांग कर रहा है वह पारदर्शी परीक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर चाहता है। लेकिन सरकार हर मामले में विफल साबित हो रही है। लाखों छात्र परीक्षा घोटाला, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से परेशान हैं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते यह न्याय और अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी।
इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला, विधायक राजेंद्र पारीक, विधायक हाकम अली खान, जिला प्रभारी विशाल जांगिड़,सही प्रभारी पी एल प्रजापति, निवर्तमान सभापति जीवण खान,संगठन महासचिव एडवोकेट पुरुषोत्तम शर्मा,ब्लॉक अध्यक्ष राजेश सैनी,एड राकेश सिहाग,जगदीश फौजी, पुर्व प्रधान भंवरलाल वर्मा,सेवादल जिलाध्यक्ष रविकांत तिवाड़ी,महीला कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजु गोदारा,एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश नागा,आर सी चौधरी,ओबीसी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष नरेश सैनी, अब्दुल रजाक पंवार, मुश्ताक तंवर,महासचिव अल्ताफ रंगरेज,रामनिवास खीचड़, विनोद जांगिड़,शकील जाटु,बर्हमन सिहाग, तनसुख औला, धर्मेंद्र गठाला सहित सेंकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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