लर्निंग सेमिनार ‘अंकुरण’ रणथंभौर में संपन्न
सवाई माधोपुर/जयपुर। रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3056 के तत्वावधान में तथा रोटरी क्लब कोटा साउथ के आतिथ्य में आयोजित दो दिवसीय क्लब लीडरशिप लर्निंग सेमिनार ‘अंकुरण’ नाहरगढ़ रिसॉर्ट, रणथंभौर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सेमिनार में जयपुर सहित डिस्ट्रिक्ट 3056 के 35 से अधिक क्लबों के लगभग 250 रोटेरियन्स एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रज्ञा मेहता ने किया। इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अरुण बगड़िया, पीडीजी अजय काला, प्रद्युम्न के. पाटनी, बलवंत चिरानिया, निर्मल कुनावट, राखी गुप्ता तथा डॉ. के.सी. शर्मा उपस्थित रहे। सेमिनार अध्यक्ष ओमप्रकाश साहनी ने स्वागत भाषण दिया तथा क्लब सचिव प्रेमराज दुबे ने अतिथियों का अभिनंदन किया।
सेमिनार का मुख्य आकर्षण डीजीई अरुण बगड़िया का “माय विजन फॉर रोटरी 2026-27” प्रस्तुतीकरण रहा। उन्होंने आगामी वर्ष के लिए सदस्यता वृद्धि, सेवा परियोजनाओं के विस्तार, जनकल्याण एवं परोपकार आधारित बड़े प्रोजेक्ट्स तथा रोटरी की सार्वजनिक छवि को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रज्ञा मेहता ने कहा कि अरुण बगड़िया के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट टीम नए उत्साह, समन्वय और संकल्प के साथ समाज सेवा के लिए तैयार है। वहीं डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी जनरल 2026-27 संजय कौशिक ने कहा कि ‘अंकुरण’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के भविष्य के नेतृत्व को विकसित करने का मंच है
सेमिनार के दौरान सदस्यता विकास, पब्लिक इमेज, रोटरी फाउंडेशन, ग्रांट मैनेजमेंट तथा नेतृत्व विकास पर विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। रोटरी फाउंडेशन समन्वयक शरद जैन एवं डॉ. सुब्रमण्यम ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
पीडीजी अजय काला एवं बलवंत चिरानिया ने रोटरी में हो रहे वैश्विक परिवर्तनों और नई कार्यशैली पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. के.सी. शर्मा (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 2028-29) ने एक अभिनव प्रतिस्पर्धात्मक सत्र का संचालन किया, जिसमें केवल 50 हजार रुपये की लागत से 10 समाजोपयोगी प्रोजेक्ट्स की अवधारणा पर रोचक वाद-विवाद आयोजित किया गया।पीके पाटनी ने युवा पीढ़ी के लिए एनजीओ की भूमिका पर सीनेट रखी।
सेमिनार की सफलता में पूनम बगड़िया एवं डॉ. रोहन गुप्ता का विशेष योगदान रहा। दोनों ने तकनीकी एवं लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन कर पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित एवं अनुशासित बनाए रखा।
सेमिनार की थीम ‘अंकुरण’ नए विचारों, नवाचार और भावी नेतृत्व के विकास का प्रतीक रही