मरीज बेहाल, जननी एक्सप्रेस बंद और मुख्यमंत्री भ्रमण में मगन; ढाई साल बाद जनता को क्या मुंह दिखाएगी भाजपा सरकार: टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा
क्यों मां की ममता के पीछे पड़ी यह निष्ठुर सरकार ? कभी प्रसूताओं की मौत तो अब जननी एक्सप्रेस बंद
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की जो भयावह तस्वीर सामने आ रही है, वह बेहद चिंताजनक और सरकार की संवेदनहीनता का जीवंत प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि ‘राइट टू हेल्थ’ (RTH) जैसा ऐतिहासिक कानून देने वाले हमारे अग्रणी राज्य में पिछले 170 दिनों से 600 ‘जननी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थमे हुए हैं। सिर्फ सरकारी ढिलाई और समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण आज रोजाना करीब 1700 गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु गंभीर आपातकाल में भी भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं, जो इस सरकार के माथे पर बड़ा कलंक है।
गंभीर नाराजगी जताते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है, जनता इलाज के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन इन सबके बीच सूबे के मुखिया यानी मुख्यमंत्री जी सिर्फ हवाई दौरों और राजनीतिक भ्रमण में मगन हैं। जूली ने सरकार को चेताते हुए कहा कि अब केवल ढाई साल ही बचे हैं। जनता की सुध न लेने वाली यह निकम्मी सरकार वक्त पूरा होने पर आखिर किस मुंह से जनता के बीच जाएगी और अपनी इन नाकामियों पर क्या जवाब देगी?
नेता प्रतिपक्ष ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि यह बदहाल स्थिति साफ दर्शाती है कि वर्तमान भाजपा सरकार के कुप्रबंधन के कारण राज्य की वित्तीय और प्रशासनिक हालत किस कदर बिगड़ चुकी है और पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
जूली ने सवाल उठाया कि जब चिकित्सा जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र और आपातकालीन जीवनरक्षक सुविधाओं का सचिवालय से लेकर जमीन तक यह हाल है, तो सरकार के अन्य विभागों की जमीनी स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है; पूरी सरकार केवल विज्ञापनों और आपसी खींचतान में मगन है।
जूली ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के बजट को जानबूझकर अटकाकर आम जनता और गरीब तबके के जीवन को संकट में डालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए सीधा आग्रह किया कि वे सत्ता के इस ढुलमुल रवैये को तुरंत छोड़ें, वातानुकूलित कमरों में बैठकर कागजी ‘विचार’ करने का समय अब बीत चुका है, इसलिए सरकार तुरंत समाधान निकाले और इन महीनों से बंद पड़ी एम्बुलेंस सेवाओं को अविलंब सड़कों पर दौड़ाकर जनता को राहत प्रदान करे।
हाड़ौती अंचल की बदहाली का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोटा में पिछले दिनों प्रसूताओं की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था, और अब जांच में जो खुलासा हुआ है वह रूह कंपा देने वाला है। कोटा में जांच के लिए उठाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पूरी तरह अमानक (फेल) पाए गए हैं, जो यह साबित करता है कि सरकारी अस्पतालों में नकली और घटिया दवाइयों का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। हद तो तब हो गई जब अभी एक दिन पहले ही कोटा के ही सुल्तानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों को आईवी फ्लूइड (ग्लूकोज) चढ़ाते ही उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी।