जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम के खिलाफ एक मामले में जहां बरी कर दिया, लेकिन पॉक्सो मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है।
हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम बापू को राहत देने से इनकार करते हुए आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने आसाराम समेत तीन आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
बुधवार को जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए आशाराम को
गैंगरेप की धारा से बरी कर दिया, लेकिन अन्य गंभीर आरोपों में दोषसिद्धि कायम रखी गई है। साथ ही कोर्ट ने आसाराम को तत्काल सरेंडर करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि अपील पर फैसला अभी लंबित है, इसलिए 29 अक्टूबर 2025 को दी गई अंतरिम जमानत पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ निर्णय आने तक अथवा 7 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि 29 अप्रेल 2026 को भी अंतरिम राहत को 25 मई तक या निर्णय आने तक बढ़ाया गया था। चूंकि फैसला अब तक सुनाया नहीं गया है, इसलिए राहत को आगे बढ़ाया गया है। आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने पक्ष रखा।
उन्होंने अदालत को बताया कि आसाराम और अन्य सह-अभियुक्तों की ओर से सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई 20 अप्रेल को पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हाईकोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को आसाराम को छह माह की अंतरिम जमानत दी थी। आसाराम को वर्ष 2013 में मणाई स्थित अपने आश्रम में नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने उसे पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसकी सजा के खिलाफ दायर अपील पर राजस्थान हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित है।