बूंदी। महिला आरक्षण पर तेज होती राजनीति के बीच चौमूं विधायक शिखा मील बराला ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की मंशा कभी भी महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व देने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता, तो राजस्थान को वसुंधरा राजे के रूप में तीसरी बार महिला मुख्यमंत्री मिलती।
बूंदी में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस विधायक ने कहा कि भाजपा झूठ और भ्रमजाल की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को केवल चुनावी फायदा लेने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि व्यवहार में महिलाओं को पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। बराला ने कांग्रेस की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कांग्रेस ने ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि 1996 में महिला आरक्षण विधेयक कांग्रेस के समर्थन से संसद में पेश हुआ था और 2010 में यूपीए सरकार के दौरान राज्यसभा में पारित कराया गया। साथ ही, 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर महिलाओं को राजनीतिक मुख्यधारा में लाने का काम भी कांग्रेस ने किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को भाजपा सरकार ने तत्काल लागू नहीं किया, बल्कि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टाल दिया। इससे साबित होता है कि भाजपा महिलाओं को अधिकार देने के बजाय इस मुद्दे को लटकाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। विधायक बराला ने यह भी सवाल उठाया कि जब 2023 में बिल पारित हो चुका था और राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गई थी, तो इसे 16 अप्रैल 2026 को लागू करने में देरी क्यों की गई? उन्होंने इसे भाजपा की राजनीतिक रणनीति करार दिया। परिसीमन के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए देश के निर्वाचन मानचित्र को बदलना चाहती है। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में परिसीमन के उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताया।
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर निशाना साधते हुए बराला ने कहा कि पार्टी में महिलाओं को न तो पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है और न ही चुनावों में पर्याप्त टिकट दिए जाते हैं, जिससे उसके महिला सशक्तिकरण के दावे खोखले साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण को महिलाओं का अधिकार मानती है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग करती है। कांग्रेस पार्टी सड़क से संसद तक महिलाओं के अधिकार के लिए संघर्ष करती रहेगी।