जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी अब अपने भाषणों को लेकर स्पष्टीकरण देना पड़ रहा हैं। राजे ने दो दिन से वायरल हो रहे अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए इसे षड्यंत्र करार दिया है। शनिवार को वीडियो के जरिए वसुंधरा राजे ने स्पष्ट किया कि उनके लिए जनता का स्नेह किसी भी राजनीतिक पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए जनता के प्यार से बड़ा कोई पद नहीं है, और यह स्नेह मुझे प्रदेशभर में भरपूर मिल रहा है। षड्यंत्रपूर्वक मैरे बयान को गलत प्रचारित किया गया। राजे ने हाल ही में झालावाड़ जिले के कामखेड़ा बालाजी प्रांगण में सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा के दौरान उनके बयान को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति साफ की।
वसुंधरा राजे ने कहा कि उनके संवाद को गलत संदर्भ में पेश किया गया है और यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी पद की इच्छा व्यक्त नहीं की, बल्कि हमेशा जनता के साथ अपने रिश्ते को सर्वोपरि माना है। उनके अनुसार, इस तरह के भ्रामक प्रचार से न केवल उनके शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, बल्कि जनता को भी भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने उस घटनाक्रम का भी उल्लेख किया जिसमें वे क्षेत्रवासियों को सड़क निर्माण से जुड़ी स्थिति समझा रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में एक फोरलेन सड़क का निर्माण हो रहा है, जिसके बाइपास के एलाइमेंट को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्ति थी. इस पर उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि धौलपुर में उनके स्वयं के घर के सामने से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरने के कारण उन्हें अपनी बाउंड्री पीछे हटानी पड़ी थी। उन्होंने कहा, जब मैं अपने ही घर को नियमों के कारण बचा नहीं सकी, तो किसी और के लिए नियमों को कैसे बदल सकती हूं।’
राजे ने यह भी कहा कि झालावाड़ उनके लिए केवल एक राजनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि परिवार जैसा है। यहां के लोगों के साथ उनका संबंध बेहद आत्मीय और अनौपचारिक रहा है। ऐसे में उनके साधारण संवाद को राजनीतिक रंग देकर पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा जनहित को प्राथमिकता देती आई हैं और आगे भी जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी। उनके अनुसार, राजनीति में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता का विश्वास और प्यार होता है, जो उन्हें निरंतर प्रेरित करता है। दरअसल, दो दिन पहले राजे ने झालावाड़ के कामखेड़ा बालाजी प्रांगण में लोगों से संवाद के दौरान एक उदाहरण देते हुए कहा था कि ‘धौलपुर में मेरे घर के सामने से राष्ट्रीय राजमार्ग निकला तो मुझे भी अपनी बाउंड्री पीछे लेनी पड़ी। मैं अपने लिए भी नहीं लड़ सकी, जब मैं अपना ही नहीं बचा पाई, तो आपका कैसे बचा पाऊंगी?’