नई दिल्ली। मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की मीडिया रिपोर्ट आने के बाद सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, CJP ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो पार्टी दिल्ली से एक बड़े देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेगी।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, “बीजेपी 2024 के चुनावों में बहुमत हासिल नहीं कर पाई। बहुमत न मिलने पर उनमें घबराहट फैल गई। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद वे 240 सीटों पर सिमट गए। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मज़बूती से उभरकर सामने आई हैं। चाहे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, एनसीपी, एम के स्टालिन, पिनाराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी, ये सभी मुख्यमंत्री एक-एक करके हार गए हैं। यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता. आप एक पैटर्न देख सकते हैं। ये सभी मुख्यमंत्री एक साथ आए थे और 2024 में एकजुट होकर प्रचार किया था। वे एक-एक करके कैसे बाहर हो गए? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से 50,000 वोट हटा दिए गए और वे लगभग 15,000 वोटों से हार गईं। एम के स्टालिन की सीट से एक लाख वोट हटा दिए गए और वे लगभग 45,000 वोटों से हार गए। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से 40,000 वोट हटा दिए गए और वे लगभग 4,000-5,000 वोटों से हार गए।
अभिजीत दीपके ने कहा कि हाल ही में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव एक बड़ा धोखा बन चुका है। सीजेपी ने दावा किया कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं
अभिजीत दीपके ने कहा कि जब से ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त पद संभाला है, देश में जनता द्वारा सरकार चुनने की परंपरा प्रभावित हुई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मामूली वोटों के अंतर वाले चुनावी राज्यों में इस प्रकार बड़े पैमाने पर नाम काटना एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे क्षेत्रीय दलों और विपक्ष के मजबूत चेहरों को कमजोर किया जा सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरभ दास ने कहा कि चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों ने भी कई फैसलों और एसआईआर प्रक्रिया पर अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज की थीं, जिन्हें दरकिनार किया गया। स्थानीय स्तर के अधिकारियों (ईआरओ/एसडीएम) के अधिकारों को सीमित कर सारा नियंत्रण एक केंद्रीय सॉफ्टवेयर और दिल्ली स्तर पर केंद्रित करने का आरोप लगाया गया।
सीजेपी ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें और उनके खिलाफ निष्पक्ष आपराधिक व देशद्रोह जैसी धाराओं के तहत जांच शुरू की जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि इन फैसलों के पीछे किसका निर्देश था।
साथ ही आगामी चुनावों से पहले एसआईआर प्रक्रिया को फ्रीज किया जाए, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल किया जाए और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग गठित किया जाए।
इसके साथ ही चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को बदला जाए और इसमें सिविल सोसाइटी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
सीजेपी नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका द्वारा चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो देश के युवाओं और नागरिकों को साथ लेकर राजधानी दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।