जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अरावली बचाव के मुद्दे पर नायक बनकर उभरते नजर आ रहे हैं। अशोक गहलोत की ओर से इस मुद्दे को उठाये अरावली मुद्दे पर गहलोत का पलटवार
जाने के बाद पूरे देश में सेव अरावली का नारा बुलंद हो गया है।
गहलोत ने अरावली मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ पर अरावली मामले में पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की खनन माफिया से मिलीभगत और गलत नीतियों पर पर्दा डालने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, जबकि सच्चाई सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है।
गहलोत ने रविवार को एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह सच है कि 2003 में तत्कालीन राज्य सरकार को विशेषज्ञ समिति ने आजीविका और रोजगार के दृष्टिकोण से ‘100 मीटर’ की परिभाषा की सिफारिश की थी, जिसे राज्य सरकार ने एफिडेविट के माध्यम से 16 फरवरी 2010 को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा, लेकिन कोर्ट ने इसे महज तीन दिन बाद 19 फरवरी 2010 को ही खारिज कर दिया था।
हमारी सरकार ने न्यायपालिका के आदेश का पूर्ण सम्मान करते हुए इसे स्वीकार किया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से मैपिंग करवाई। गहलोत ने कहा हमारी कांग्रेस सरकार ने पहली बार अरावली में अवैध खनन पकड़ने के लिए गंभीर प्रयास करते हुए ‘रिमोट सेंसिंग’ का उपयोग करने के निर्देश दिए।15 जिलों में सर्वे के लिए 7 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने अवैध खनन को रोकने की सीधी जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को सौंपी। खान विभाग के साथ पुलिस को भी कार्रवाई के अधिकार दिए गए जिससे अवैध खनन पर लगाम लगी।
गहलोत ने कहा कि जो परिभाषा सुप्रीम कोर्ट में 14 साल पहले 2010 में ही खारिज हो चुकी थी, उसी परिभाषा का 2024 में राजस्थान की मौजूदा भाजपा सरकार ने समर्थन करते हुए केन्द्र सरकार की समिति से सिफारिश क्यों की? क्या यह किसी का दबाव था या इसके पीछे कोई बड़ा खेल है?
गहलोत ने कहा कि ने कहा कि हमारी सरकार की नीति अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की रही है। हमारी कांग्रेस सरकार (2019-2024) ने अवैध खनन कर्ताओं से 464 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला, जो कि पिछली भाजपा सरकार (2013-2018) द्वारा वसूले गए 200 करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक है।
कांग्रेस सरकार ने पिछले 5 वर्षों में 4,206 FIR दर्ज कर माफियाओं की कमर तोड़ी थी। वहीं, वर्तमान सरकार के पहले साल के आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई की गति धीमी पड़ गई है, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने पिछले 5 वर्षों में 4,206 FIR दर्ज कर माफिया की कमर तोड़ी, जिनमें पहले तीन वर्षों में ही (2019-20 में 930, 2020-21 में 760 और 2021-22 में 1,305 FIR दर्ज कर खनन माफियाओं को कानून के कठघरे में खड़ा किया।
वहीं, मौजूदा भाजपा सरकार (2024-25) पहले साल में केवल 508 FIR दर्ज कर पाई है। FIR की संख्याओं में यह गिरावट दिखाती है कि भाजपा सरकार खनन माफिया के प्रति नरम है, जिससे खनन माफिया के हौसले फिर से बुलंद हो रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की जीवनरेखा है जो थार मरुस्थल को बढ़ने से रोकती है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव स्वयं इसी प्रदेश से आते हैं। उनसे अपेक्षा थी कि वे अरावली के संरक्षक बनेंगे, न कि विनाशक। जिस प्रकार खेजड़ली में हमारे पूर्वजों ने अमृता देवी के नेतृत्व में पेड़ों एवं प्रकृति के लिए बलिदान दिया था एवं उसी भावना के साथ हमें अरावली को बचाना होगा।
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