राजस्थान बिजली वर्कर्स फेडरेशन का सम्मेलन सम्पन्न
श्रमिक एकजुट होकर संघर्ष करें-अमरजीत कौर
श्रम संहिताएं गुलाम बनानेवाली ,युद्ध साम्राज्यवाद के पोषक
न्यायाधीश जनता के कस्टोडियन- गोविन्द माथुर
बिजली का जाल सार्वजनिक क्षेत्र से-मोहन शर्मा
जयपुर। आल इंडिया ट्रेड यूनियन कॉंग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर राजस्थान बिजली कर्मचारी फेडरेशन का उद्घाटन करते हुए बिजली श्रमिकों और देश के सभी श्रमिकों का आह्वान किया कि वे एकजुट होकर निर्भय होकर अपनी लड़ाई व अपनी यूनियन की लड़ाई लड़ें। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के सार्वजनिकीकरण के रक्षा की लड़ाई एक बुनियादी लड़ाई है।चार श्रम संहिताओं के ज़रिये श्रमिकों पर जो हमला हुआ है उसे लागू नहीं होने दें।
अमरजीत कौर ने कहा आज की सरकार श्रमिकों को दासता की ओर धकेल रही है,जबकि श्रमिकों के पहले अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंशन में हमने श्रमिकों के लिए 8 घंटे काम की माँग की।अब फिर से पॉंच सेबर कोड के ज़रिये हमें गुसाम बनाना चाहते हैं।लेबर कोड के ज़रिए श्रमिकों पर जो हमला हुआ है उसे लागू नहीं होने देना है।हम पर राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा है।हम स्वीकार करते हैं ।हम याद दिलाना चाहते हैं कि 1922में बिहार के झरिया(आज का झारखंड) में हमने हिन्दुस्तान की पूर्ण आज़ादी की माँग की थी।आज़ादी की लड़ाई में ट्रेड यूनियन सड़कों पर थी ,उसी के आधार पर हसरत मुहानी ने पूर्ण स्वराज की मॉंग की थी।
अमरजीत ने कहा श्रमिक व आम आदमीं युद्ध नहीं चाहता केवल एकाधिकार चाहनेवाले साम्राज्यवादी देश ही युद्ध होते हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायाधीश रहे गोविन्द माथुर ने कहा कि न्यायाधीश संविधान और लोगों के अधिकारों का संरक्षक होता है।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान संघर्षों का परिणाम है,श्रमिक वर्ग उसमें अगुवा रही है।आज संघर्ष करनेवालों को टुकड़े टुकड़े गैंग कहा जाता है जबकि श्रमिक समाज को जोड़ता है। उन्होंने कहा किउन्होंने कहा कि पॉंच साल में एक बार वोट देना ही लोकतंत्र नहीं है।उसकी रक्षा करना भी लोकतंत्र है।न्यायपालिका की आलोचना अवमानना नहीं है,संविधान में इसका अधिकार है,ग़लत नियत से निन्दा करना अवमानना होती है।न्यायाधीशों से निष्पक्षता व निडरता की उम्मीद की जाती है।उन्होंने समाज में सभी धर्मों व वर्गों में अविश्वास को दूर करने के प्रयास करें।
फेडरेशन के अखिल भारतीय महासचिव मोहन शर्मा ने कहा कि भारत में बिजली फ़ेडरेशनों ने खुलकर आपने सामने की लड़ाई लड़ी है उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र में विकास का जाल फैलाया है जिसे पॉवर परचेजिंग के क़ानून के तहत बिना किसी निवेश और शर्तों के निजी क्षेत्र को सौंपा जा रहा है,यह विकास को समाप्त करने की कोशिश है।उन्होंने राजस्थान बिजली फेडरेशन को खुलकर सामने और संघर्ष करने के लिए बधाई दी। राजस्थान एटक के महासचिव कुणाल रावत ने कहा कि आज श्रमिक हर जगह संगठित होने को तैयार है क्योंकि हर क्षेत्र में श्रमिकों का शोणित होरहा है।वंचित और धनाढ्यों का झगड़ा हमेशा रहा है लेकिन वर्तमान में हमारे संघर्षों को नकारा जा रहा है।
एटक के अध्यक्ष एम एल यादव ने कहा कि राजस्थान में बिजली फेडरेशन के छोटे से संगठन को आज पूरे प्रदेश में फैला दिया गया है।इसके कार्ड को और बढ़ाने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में प्रदेश महासचिव केशव व्यास ने फेडरेशन की गतिविधियों की रिपोर्ट पेश की जिसमें बिजली इकाइयों के निजीकरण और उनके बंद होने की जानकारी दी ।उन्होंने ने श्रमिकों की समस्या हल करने के लिए अलग से श्रम मंत्री नहीं होने तो श्रमिकों की समस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने की शिकायत की।
सम्मेलन में अन्य कई मुद्दों पर चर्चा होकर प्रस्ताव पारित किए गए जिनमें विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेने,राजस्थान की सरकारी बिजली कम्पनियों में किसी भी तरह की फ़्रेंचाइज़ी मोडल,INVIT मोडल,पी पी पी मोडल अथवा अन्य किसी नाम पर निजीकरण नहीं किया जाए
सरकारी बिजली कम्पनियों को वित्तीय रूप से मज़बूत बनाने के लिए उन्हें विशेष पैकेज और आर्थिक सहायता दिया जाए।
किसी भी नीति परिवर्तन से पूर्व सभी बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लिया जाए।
सम्मेलन की अध्यक्षता बनवायीलाल सांगा,गजराज सिंह और हरिलाल ने की।सम्मेलन में 53 सदस्यीय कार्यकारिणी का चयन किया गया।