जयपुर। देश में चल रहे zen G आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की मांग पर भाजपा नेताओं की ओर से सवाल उठाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सत्ता परिवर्तन की मांग नाजायज कैसे हो सकती है।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा के आरोपों पर कहा कि चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन इस देश में हमेशा से होता आया है, और उसकी मांग करना न अपराध है, न साजिश। भाजपा के बड़े नेता अब कह रहे हैं कि विपक्ष बांग्लादेश जैसी अराजकता और सड़क के आंदोलनों से सत्ता बदलना चाहता है। भाजपा को बताना चाहिए कि राहुल गांधी की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन में कहां हिंसा नजर आई? लंबे समय बाद 12 अक्टूबर को दिल्ली में इतना अनुशासित, शांतिपूर्ण और उत्साह से भरा मार्च देखा गया, जिसमें न सिर्फ इंडिया गठबंधन के सभी दलों के राजनेता और राजनीतिक कार्यकर्ता, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता, आम लोग और जेन-जी भी शामिल हुए।
2014 से पहले लोकपाल पर अन्ना हजारे का आंदोलन हुआ, कालाधन पर बाबा रामदेव ने आंदोलन किया और 2जी व कोलगेट जैसे मुद्दों के नाम पर भी सड़कों पर आंदोलन हुए। दिल्ली में लाखों की भीड़ जुटाई गई। 2014 में कांग्रेस चुनाव हार गई और हमने जनादेश का सम्मान किया। हमने लोकतांत्रिक धरने-प्रदर्शनों को भाजपा की तरह देश-विरोधी साजिश या सरकार बदलने के लिए अराजकता फैलाने की कोशिश बताने का प्रयास नहीं किया।
लोकतंत्र में विपक्ष का काम ही है जनहित में सरकार का विरोध करना, उसकी पोल खोलना और जनता के बीच जाकर उसे सत्ता से हटाने की मांग करना। यही बात स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी भी कहा करते थे। हमारे नेता राहुल गांधी का दर्शन तो “नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान” है। इसमें अराजकता का कोई स्थान ही नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने तो इस देश में लोकतंत्र की नींव रखी है और बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के माध्यम से उसे और मजबूत किया है।
लोकतंत्र में सवाल पूछना अराजकता नहीं, जनता का अधिकार है। भाजपा जितना दबाने की कोशिश करेगी, यह आवाज उतनी ही बुलंद होगी।