जयपुर। राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में महेश जोशी अब तक 13 महीने की सजा काट चुके हैं। पहले ईडी की गिरफ्त में रहते हुए 7 महीने जेल में रहे थे और सुप्रीम कोर्ट ने ही जमानत दी थी।
अदालत ने इस प्रकरण के एक अन्य आरोपी मुकेश पाठक को भी जमानत दी है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को राहत प्रदान की है।
महेश जोशी राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मंत्री थे। जल जीवन मिशन के तहत टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में ACB ने उन्हें 7 मई 2026 को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह इस मामले में जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
महेश जोशी ने ACB के मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश की थीं। इसके बाद 12 अक्टूबर को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें नियमित जमानत दे दी है।
इससे पहले अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और सरकारी खजाने को कथित तौर पर हुए बड़े आर्थिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय दिया था। पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी उस समय खारिज की गई थीं। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में महेश जोशी की गिरफ्तारी से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। अप्रैल 2025 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वह करीब सात महीने तक जेल में रहे थे। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी।