ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश

तिरुवनंतपुरम। देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी केंद्रीय चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए विधानसभा ने प्रस्ताव पेश किया है। ऐसा प्रस्ताव केरल विधानसभा में पेश किया गया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नागरिकों को वोट देने के उनके मौलिक अधिकार से वंचित करना संविधान का खुला उल्लंघन है।
प्रस्ताव इस बात पर प्रकाश डालता है कि फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में किए गए परिवर्तन अत्यधिक गंभीर हैं और बताते हैं कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए कई निर्णयों में आयोग के अन्य सदस्यों के समर्थन का अभाव था। नतीजतन, यह केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त को जल्द से जल्द हटाने की पुरजोर मांग करता है।
बीजेपी विधायक बी. गोपकुमार और वी. मुरलीधरन ने प्रस्ताव में बदलाव का प्रस्ताव रखा। साजी चेरियन ने भी एक बदलाव पेश किया, जिसमें 24 लाख वोटरों को बाहर रखने और ‘ईसीआईडॉट नेट’ नाम का एक सॉफ्टवेयर बनाने की बात कही गई। हालांकि, सरकार ने बीजेपी सदस्यों और दो सीपीएम विधायकों के बदलाव को खारिज कर दिया। इस बीच सरकार ने विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के सुझाए गए ज़ुबानी बदलाव को मान लिया, जिन्होंने ‘लाखों वोटरों को बाहर रखा गया’ वाक्यांश को बदलकर करोड़ों वोटर करने की मांग की।

प्रस्ताव में आगे यह भी मांग की गई है कि वोटर लिस्ट तैयार करने और वेरिफाई करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ियों को ठीक करके सभी योग्य नागरिकों के वोटिंग अधिकार को तुरंत बहाल किया जाए। इसमें कहा गया है कि मौजूदा काम रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 का सरासर उल्लंघन है।
संविधान के आर्टिकल 326 के तहत मिले वोट के बुनियादी अधिकार को छीनना एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि तकनीकी हेरफेर के ज़रिए पिछड़े समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मज़दूरों और युवा वोटरों को उनके वोट से दूर रखना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ बेंच ने पहले फैसला दिया था कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे कमिश्नरों को अपॉइंट करने वाली सिलेक्शन कमिटी में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का होना जरूरी है, लेकिन, बाद में केंद्र सरकार के बनाए एक कानून ने चीफ जस्टिस को बाहर कर दिया और रूलिंग पार्टी की मेजॉरिटी पक्का करने के लिए सिलेक्शन कमिटी में बदलाव कर दिया। इससे संस्थान की तटस्थता खत्म हो गई। प्रस्ताव में कहा गया है कि सिर्फ प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया वाला एक निष्पक्ष पैनल ही सही मायने में इंडिपेंडेंट कमिश्नरों की पहचान कर सकता है, इसलिए यह इन तीन सदस्यों वाली सिलेक्शन कमिटी को फिर से बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग करता है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने प्रस्ताव का सपोर्ट किया, जबकि बीजेपी ने इसका विरोध किया।

सेशन के दौरान विपक्ष ने मांग की कि मुख्यमंत्री, जिन्होंने प्रस्ताव पेश किया था, पहले यह साफ करें कि उन्होंने कानूनी तौर पर पद संभाला है या नहीं। मामले में दखल देते हुए स्पीकर ने सदस्यों को लंबे भाषण दिए बिना नियमों के मुताबिक अपने अमेंडमेंट पेश करने का निर्देश दिया। इसके बाद विपक्ष ने 2026 के केरल विधानसभा चुनाव रद्द करने और विधानसभा भंग करने की मांग करते हुए एक अमेंडमेंट पेश किया। इसके बाद, एक और सदस्य ने प्रस्ताव में बदलाव का सुझाव देते हुए और अमेंडमेंट पेश किए।

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