जयपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राजस्थान दौरे पर थे तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा और राज्य सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोलते हुए उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि घटना के इतने समय बाद भी आरोपियों को सजा नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और आरोपियों को सजा दिलाने में इतनी देरी क्यों हो रही है ?
गहलोत ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर जमकर राजनीतिक माहौल बनाया था। ऐसे में अब केंद्रीय गृह मंत्री को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया कहां तक पहुंची है ? कन्हैयालाल के परिवार की स्थिति आज भी बेहद गंभीर और पीड़ादायक है। उनकी कन्हैयालाल के परिवारजनों से बातचीत हुई है। परिवार किन परिस्थितियों से गुजर रहा है, इसे समझना बेहद जरूरी है। सरकार की जिम्मेदारी है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कानून के तहत जल्द से जल्द सजा मिले।
गहलोत ने कहा कि सरकार को इस मामले पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय यह बताना चाहिए कि अब तक क्या हुआ है और आरोपियों को सजा मिलने में देरी क्यों हो रही है ? सोनिया गांधी को लेकर भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों ओर गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर भी गहलोत ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश इस मामले में पहले ही स्पष्टीकरण दे चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा बार-बार उसी मुद्दे को उठा रही है। गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों हताश नजर आ रहे हैं। लोकसभा में भी उनकी स्थिति सबके सामने दिखाई दे रही है।
भजनलाल सरकार पर हमला बोलते हुए गहलोत ने कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों को भी अपनी ही सरकार में अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ रहा है। उनकी राजनीतिक जिंदगी में उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि किसी मंत्री को कमिश्नर या कलेक्टर के खिलाफ धरना देना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मंत्री शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों की भी कलेक्टर-एसपी नहीं सुन रहे हैं। जब मंत्रियों की ही बात नहीं सुनी जा रही तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसी को लेकर गहलोत ने राज्य सरकार को ‘निकम्मी और नकारा’ बताते हुए कहा कि राजस्थान में सरकार नाम की कोई चीज दिखाई नहीं दे रही।
गहलोत ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर आरोप लगाया कि सरकार चुनाव कराने से घबरा रही थी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव करवा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कलेक्टर और एसपी की अलग अलग बैठकें लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल दबाव बना रहे हैं और कह रहे हैं कि निकाय पंचायत चुनाव में भाजपा को जीत दिलाओ। यह बेहद गंभीर आरोप है और उन्होंने यह बात सोच-समझकर कही है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से इस पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
गहलोत ने कहा कि सरकार को जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. पानी, बिजली, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए, लेकिन ऐसा नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कांग्रेस सरकार के दौरान संचालित मुफ्त इलाज, मुफ्त दवा और मुफ्त ऑपरेशन जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज गरीब व्यक्ति अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर परेशान है। सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद लोगों पर पड़ रहा है।
गहलोत ने कहा कि कई जगह लोग अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर बातचीत करने को तैयार नहीं है। उन्होंने खुद कई धरनास्थलों पर जाकर लोगों से मुलाकात की है और उनकी समस्याएं सुनी हैं। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में धरना और प्रदर्शन जनता का अधिकार है और कांग्रेस जनता की आवाज के साथ खड़ी है। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे भूख हड़ताल से बचें। ।लोग अपनी मांगों के लिए धरना दें, प्रदर्शन करें और सरकार पर दबाव बनाएं, लेकिन अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला कदम नहीं उठाएं, क्योंकि सरकार को आपकी भूख हड़ताल से कोई मतलब नहीं है।