छात्रसंघ चुनाव की माग पर अनशनरत नेता का अनशन खत्म

जयपुर। प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव करने की मांग सहित राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग पर 20 दिनों से अनशन कर रहे छात्र नेता शुभम रेवाड़ का अनशन बुधवार शाम नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जूस पिलाकर समाप्त कराया। साथ ही आश्वासन भी दिया कि छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी दोपहर में एसएमएस अस्पताल पहुंचे थे और शुभम से अनशन समाप्त करने की अपील की थी।

शुभम रेवाड़ पिछले कई दिनों से राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में भूख हड़ताल और अनशन कर रहे थे। इसके चलते उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से उठाकर एसएमएस अस्पताल में भर्ती करा दिया था। वहां भी शुभम रेवाड़ भूख हड़ताल और अनशन कर रहे थे जिसके चलते उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ती जा रही थी
इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि भजनलाल सरकार किसी की भी नहीं सुन रही है। शुभम रेवाड़ पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर है. छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांग नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि हम छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में भी पुरजोर तरीके से उठाएंगे. इसका आश्वासन हमने छात्रों को दिया है।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार किसी की नहीं सुन रही है। हम लगातार इस बात का प्रयास करके सरकार उनकी मांग को सुने। उन्होंने कहा कि यह वही मांग है जो भाजपा विपक्ष में उठाती थी। राजस्थानी भाषा को मान्यता देने का मामला केंद्र सरकार के पास है। प्रदेश भर में लोग धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार ने आंखें बंद कर रखी है। जो भी धरने प्रदर्शन कर रहा है, उनको जबरन उठाया जा रहा है।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली पाठशाला है। छात्र राजनीति से निकलकर अनेक नेता राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर तक पहुंचे हैं  उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे थे, राजस्थान में भी रघु शर्मा, महेश जोशी, राजेंद्र राठौड़ सहित अनेक नेता छात्र राजनीति से आगे बढ़े हैं  वह स्वयं भी छात्र राजनीति से निकले हैं और चुनाव हारने के बावजूद राजनीति में शिखर तक पहुंचे है। गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में छात्रसंघ चुनाव इसलिए नहीं हो पाए थे क्योंकि अंतिम समय में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई थी, उस समय कांग्रेस सरकार ने स्पष्ट कहा था कि चुनाव समाप्त होने के बाद छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *