प्रधान का इस्तीफा,राहुल गांधी के संघर्ष की जीत

जयपुर। नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को ल अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया। प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और युवाओं ने इसे अपने संघर्ष की जीत बताया है। इस्तीफे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राहुल गांधी और युवाओं के संघर्ष की जीत बताया है। दोनों नेताओं ने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत हुई है और तानाशाही की हार हुई है।

गहलोत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जवाबदेही से भागने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग के साथ पेपर लीक के खिलाफ राहुल गांधी एवं लाखों छात्रों के संघर्ष की आज जीत हुई है। भारी दबाव के आगे पीएम मोदी को झुकना पड़ा है और अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा है। पीएम मोदी ने उनका काफी समय तक बचाव किया, लेकिन उन्हें बचा नहीं पाए।
गहलोत ने कहा कि आज ही मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने फिर दोहराया था कि प्रधान को बर्खास्त किया जाना चाहिए। यह इस लोकतंत्र की ताकत है कि तानाशाही करने वाली सरकार को देश की मांग के आगे झुकना पड़ा। यह इतिहास में दर्ज हो गया कि कैसे छात्रों पर पैलेट गन चलाने जैसी बर्बरता हुई और छात्रों की आवाज बुलंद करने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कैसे घसीटा गया। आज लोकतंत्र की जीत हुई और तानाशाही की हार हुई है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली इस अंधी-बहरी सरकार को जनता माफ नहीं करेगी और हमारा यह संघर्ष छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगा।
डोटासरा ने इस्तीफे के बाद एक्स पर लिखा कि ये भारत के छात्रों की गूंज, उनके संघर्ष, न्याय और सत्य की जीत है. जंतर-मंतर पर पिछले 1 महीने से ज्यादा संघर्ष, लाठियां खाने, बर्बरता सहने और सड़कों पर डटे रहने वाले भारत के भविष्य युवाओं की हुंकार के आगे आखिरकार देश की बहरी मोदी सरकार को झुकना ही पड़ा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि जनशक्ति के आगे तानाशाही नहीं टिक सकती। युवाओं के न्याय की इस लड़ाई में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज को सड़क से लेकर संसद तक युवाओं की आवाज बनकर जो डटकर संघर्ष किया, आज उस न्याय की भी जीत हुई है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार युवा विरोधी सरकार को घेरने और सत्य के साथ खड़े करने का ही परिणाम है कि आज ये जवाबदेही तय हो पाई है। उन्होंने कहा कि ये जीत उन होनहार बच्चों की कीमत पर आई है, जिन्हें इस भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था ने आत्महत्या करने पर मजबूर किया. पेपर लीक और टूटते सपनों के कारण जान गंवाने वाले तमाम छात्र-छात्राओं को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

डोटासरा ने कहा कि छात्रों पर बर्बरता कराने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी देश से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही NTA जैसी संस्थाओं में आमूल-चूल सुधार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली एवं युवाओं पर दर्ज झूठी FIR वापस होनी चाहिए,लेकिन ये सिर्फ शुरुआत है। देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जिस प्रकार पहले राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ देश का सबसे कड़ा कानून बनाकर एक नजीर पेश की थी, ठीक उसी तर्ज पर पूरे देश में एक सख्त राष्ट्रीय कानून बनना बेहद जरूरी है।

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