पैट्रोल में एथेनॉल मिलाना भारी भ्रष्टाचार, जनता को होगा नुकसान -खाचरियावास
जयपुर। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति पर कहा कि भारत पहले से ही भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। देश के अनेक राज्यों में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं, इसके बावजूद गन्ना और चावल जैसी अत्यधिक पानी खपत वाली फसलों से एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
खाचरियावास ने कहा कि एक लीटर एथेनॉल के उत्पादन में लगभग 3000 लीटर पानी खर्च होता है। ऐसे समय में जब देश का बड़ा हिस्सा जल संकट से जूझ रहा है, तब इस प्रकार की नीति आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा करेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को तेजी से लागू कर रही है, जबकि इस नीति के दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनका आरोप है कि इससे करोड़ों वाहन मालिकों को भविष्य में इंजन संबंधी समस्याओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि यह पूरी नीति केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बच्चों की 80% कंपनिया एथेनाल बना रही है, व कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि एथेनॉल नीति से जुड़े सभी निर्णयों, लाभार्थियों और अनुबंधों की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि किसी भी प्रकार के हितों के टकराव या अनियमितता की निष्पक्ष जांच हो सके।
उन्होंने कहा कि आज देश में आम जनता पानी की कमी से परेशान है और कई क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में जल-गहन फसलों से बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना जनहित के विपरीत है।
खाचरियावास ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे एथेनॉल नीति और उसके संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक रहें तथा जल संरक्षण और पारदर्शी नीतियों की मांग करें, ताकि देश का भविष्य सुरक्षित रह सके।