27 तक नहरों में पानी छोड़े, वर्ना उग्र होगा आंदोलन

 

पाँचना बाँध की नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडीप में धरना 12वें दिन भी जारी, किसानों ने सरकार को दी 27 जून तक की चेतावनी

खंडीप। पाँचना बाँध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करवाने की मांग को लेकर गाँव खंडीप में चल रहा विशाल किसान धरना मंगलवार को 12वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर युवा, बच्चे, महिलाएँ, पुरुष एवं बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

धरनार्थियों ने काली पट्टी बांधकर सरकार एवं प्रशासन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया तथा चेतावनी दी कि उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करवाते हुए अविलंब नहरों में पानी छोड़ा जाए। किसानों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन अब तक धरनार्थियों की कोई सुध नहीं ले रहे हैं, जबकि भीषण गर्मी में हजारों किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आज महस्वा गाँव के किसान, युवा एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में धरना स्थल पर पहुँचकर आंदोलन को समर्थन दिया। वहीं कल कैमला गाँव के ग्रामीण एवं किसान खंडीप धरना स्थल पर पहुँचकर धरना देंगे।

आज राजीव गांधी सेवा केंद्र, खंडीप में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा पाँचना कमांड एरिया विकास संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता आयोजित हुई। बैठक में गंगापुर सिटी विधायक श्री रामकेश मीणा, संघर्ष समिति के अध्यक्ष बटुआ पटेल, 88 गाँवों के पंच-पटेल एवं कमांड क्षेत्र के किसानों ने भाग लिया।

बैठक में जिला कलेक्टर कानाराम, पुलिस अधीक्षक सुश्री ज्येष्ठा मैत्रेयी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश राजौरा, एसडीएम वजीरपुर सुधारानी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।

किसानों ने एक स्वर में कहा कि उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करवाकर पाँचना बाँध से नहरों में पानी छोड़ा जाए। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि अब वे केवल सरकार स्तर के प्रतिनिधियों से ही वार्ता करेंगे, क्योंकि निचले स्तर पर पहले ही अनेक बार वार्ताएँ हो चुकी हैं लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

संघर्ष समिति ने सरकार को 27 जून तक का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो 28 जून से यह जन आंदोलन और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

किसानों ने बताया कि पिछले लगभग 20 वर्षों से कमांड क्षेत्र के किसान नहरों में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। पानी के अभाव में हजारों बीघा भूमि बंजर हो चुकी है तथा किसान, पशुपालक और आमजन पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जल संकट के कारण पशु-पक्षियों एवं जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार पानी जैसे गंभीर जनहित के मुद्दे पर राजनीति कर रही है तथा पाँचना बाँध पर बैठे लोगों को संरक्षण प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और तपती दोपहरी में 35 से 40 हजार महिला-पुरुष आंदोलन में भाग ले रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा को नजरअंदाज कर रही है।

धरनार्थियों ने पुनः मांग की कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की तत्काल पालना कराते हुए पाँचना बाँध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जाए, ताकि किसानों, पशुपालकों एवं आमजन को राहत मिल सके।

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