सरकार जो इकबाल कायम ही नहीं कर पाई, पीएम मोदी के एक्सपेरिमेंट की कीमत चुका रहा प्रदेश
– राजस्थान में सरकार नहीं, पूरा सर्कस चल रहा है।
– साधु-संत भी असुरक्षित :
– अफसरशाही के आगे बेबस सरकार के मंत्री और उपमुख्यमंत्री
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की चरमराई कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि राजस्थान के इतिहास में यह ऐसी पहली लाचार सरकार है जिसका ढाई साल बीत जाने के बाद भी कोई इक़बाल कायम नहीं हो पाया है।
जूली ने कहा दिल्ली दरबार द्वारा राज्य पर थोपे गए ‘पीएम मोदी के एक्सपेरिमेंट’ की भारी कीमत आज राजस्थान की निर्दोष जनता, पूजनीय साधु-संत और खुद भाजपा के कार्यकर्ता अपनी जान देकर चुका रहे हैं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज प्रदेश में हालात ऐसे हो चुके हैं कि किसी को पता ही नहीं चल रहा कि सरकार कहाँ है और क्या चल रहा है? जब संत की हत्या पर मुख्यमंत्री मौन साधे हुए हों और सरकार के अपने कैबिनेट मंत्री व उपमुख्यमंत्री अफसरों के आगे बेबस हों, तो यह साफ है कि प्रदेश में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। आज प्रदेश का हर व्यक्ति पूछ रहा है कि ऐसी पंगु सरकार को कब तक सहेगा राजस्थान ?
जूली ने कहा कि बोरखेड़ा, कोटा में चंद्रेसल गांव के सुप्रसिद्ध धार्मिक मठ के महंत देवानंद महाराज की निर्मम हत्या का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह केवल एक संत की हत्या नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक आस्थाओं पर हमला है। धार्मिक आस्थाओं के नाम पर राजनीति कर सत्ता में आने वाली भाजपा सरकार के शासन में एक प्रसिद्ध धार्मिक मठ के महंत की दिनदहाड़े हत्या हो जाती है और सरकार एक शब्द तक नहीं बोलती। यह प्रदेश की चरमराई कानून-व्यवस्था, सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का जीवंत प्रमाण है। राजस्थान में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद होते जा रहे हैं कि कानून का इकबाल पूरी तरह ख़त्म हो चुका है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आमजन ही नहीं, बल्कि साधु-संत और धर्मस्थल भी सुरक्षित नहीं हैं। अपराधी खुलेआम खून बहा रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने हालिया घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधियों को किसी का भय नहीं रह गया है। अभी कुछ दिन पूर्व ही जयपुर ग्रामीण के मनोहरपुर में सरेआम एक भाजपा नेता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जब सत्ताधारी दल के नेता और संत ही इस राज में सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रदेश की आधी आबादी और आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? पूरी कानून-व्यवस्था आज वेंटिलेटर पर आ चुकी है और अपराधियों के सामने पूरी तरह सरेंडर कर चुकी है।
जूली ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि हम बार-बार इसलिए कहते हैं कि राजस्थान में सरकार का राज नहीं चल रहा है। अजमेर में हुई समीक्षा बैठक में जो हुआ, वो इस सरकार की बेबसी, अक्षमता की पोल को सार्वजनिक कर गया। जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश रावत के अपने गांव में पानी नहीं पहुंच रहा और वे अपनी ही सरकार में अधिकारियों के सामने बेबस दिखाई दे रहे हैं। मंत्री की सुनवाई नहीं हो रही, उपमुख्यमंत्री अधिकारियों की कार्यशैली से परेशान हैं और आम जनता समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटक रही है। जब सत्ता में बैठे लोगों की ही नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिक की आवाज़ किसके कानों तक पहुंचेगी? यही आज राजस्थान की सबसे बड़ी विडंबना है।
मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए जूली ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर आपकी सरकार का यही हाल है। आपके मंत्री और विधायक ही अधिकारियों के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि आपसे विशेष आग्रह है कि जरा निरंतर हवाई भ्रमण और राजनीतिक दौरों से समय निकालकर अपने साथी मंत्रियों की समस्याओं का भी समाधान कीजिए। जब तक सरकार के मुखिया ज़मीनी हकीकत को स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक प्रदेश को इस प्रशासनिक और राजनीतिक अराजकता से मुक्ति नहीं मिल सकती।