जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े केस में बिना आधार के पूर्व मंत्री महेश जोशी की एसीबी की ओर से की गई गिरफ्तारी के मामले में गृह विभाग और एसीबी के डीजी से 10 जून तक जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने यह आदेश महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अधिवक्ता स्नेहदीप ने अदालत को बताया कि एसीबी ने मामले में गत 7 मई को याचिकाकर्ता के पिता महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। इस दौरान उसके परिजनों को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप से नहीं बताए गए, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में प्रावधान है कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तार करने के कारणों की जानकारी लिखित रूप में उसके परिजनों को दी जाएगी। याचिका में कहा गया कि एसीबी की ओर से लिखित में परिजनों को यह जानकारी नहीं देने से यह गिरफ्तारी ही अवैध हो गई है। ऐसे में उन्हें दिया गया पुलिस रिमांड और उसके बाद की कार्रवाई दूषित हो गई हैं। ऐसे में उन्हें रिहा किया जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने गत 7 मई की सुबह महेश जोशी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें कुछ दिन पुलिस अभिरक्षा में रखते हुए बाद में न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल भेज दिया था इससे पूर्व उन्हें इसी मामले में ईडी की ओर से भी गिरफ्तार किया गया था, तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
उल्लेखनीय है कि साल 2021 में जल जीवन मिशन के तहत श्री श्याम ट्यूबवेल व श्री गणपति ट्यूबवेल के संचालकों की ओर से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर करोडों रुपए के टेंडर लेने का है। घोटला सामने आने पर एसीबी ने मामले की जांच आरंभ की और बाद ईडी ने भी अपने स्तर पर मामला दर्ज किया था।
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