जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सरकार पर सवाल खड़े करते हुए पचपदरा रिफाइनरी आग की गहराई से जांच की मांग की है। हालांकि पचपदरा रिफाइनरी में उद्घाटन से एक दिन पहले आग लगने के मामले को लेकर राज्य की भजनलाल सरकार विपक्ष के निशाने पर है और इस मामले में सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।
गहलोत ने मंगलवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि नई रिफाइनरी में आग लगने का सवाल ही नहीं होता। कहीं न कहीं चूक हुई है। गहलोत ने ऑस्ट्रेलिया के एक विशेषज्ञ का हवाला देते हुए कहा कि मेरी उनसे बात हुई है। विशेषज्ञ का कहना है कि 20-25 साल पुरानी रिफाइनरी में आग लग जाती है, लेकिन नई रिफाइनरी में आग नहीं लग सकती है। पिछले 25 साल में ऐसा कभी नहीं सुना कि किसी रिफाइनरी में आग लग गई है। गहलोत ने कहा कि विशेषज्ञ का कहना है कि कहीं न कहीं सरकार की ओर से इसमें चूक हुई है या जल्दबाजी में शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
पूर्व सीएम ने कहा कि हो सकता है कि सरकार पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला गया हो। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ ने बताया है कि वहां पर सिखाया जाता है कि रिफाइनरी में प्रोडक्शन से पहले सेफ्टी पर ध्यान रखो। गहलोत ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि आग लग गई है। इस मामले में सरकार को गहराई में जाकर जांच करना चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई इस तरह के वीडियो चलते हैं, जिसमें रिफाइनरी में आग लगने की बात सामने आती है. हालांकि, उन वीडियो का इससे कोई जुड़ाव नहीं है।
गहलोत ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा कि वो महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पारित हो गया था और सरकार को चाहिए कि लोकसभा की 543 सीटों में ही 33 परसेंट के हिसाब से महिलाओं को आरक्षण दे दे, लेकिन सरकार की मंशा आरक्षण देने की नहीं है। सरकार महिला आरक्षण बिल की आड़ में मनमर्जी से परिसीमन का अधिकार चाहती थी, जिसे विपक्ष ने कामयाब नहीं होने दिया।
अशोक गहलोत ने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपने हिसाब से परिसीमन किया है। असम में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सर्वाधिक वोट मिले थे, लेकिन उसके बावजूद कांग्रेस को तीन सीट मिली, जबकि भाजपा को 9 सीट मिली थी। ऐसा ही परिसीमन यह पूरे देश में करना चाहते थे, ताकि सत्ता में बने रहें. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में भी घनश्याम तिवाड़ी, राजेंद्र राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी इसी तरीके से गुपचुप परिसीमन करने के काम में लगे हुए हैं। गहलोत ने कहा कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर मोदी सरकार परिसीमन करना चाहती थी। जनता समझ गई है कि उनकी मंशा क्या है, क्यों उन्होंने 2021 की जनगणना नहीं कराई।
गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार चीन और रूस की तरह चुनाव कराना चाहती है, जहां पर चुनाव नाम मात्र के हों। यह बहुत ही खतरनाक मानसिकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में भजनलाल सरकार चुनाव नहीं करा रही है। हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद चुनाव नहीं कराए गए। गहलोत ने कहा कि एक बार हम भी चुनाव टाल रहे थे, क्योंकि राजस्थान में कर्मचारियों के हड़ताल चल रही थी। उसके बावजूद हमने चुनाव कराए और हमने चुनाव में जीत दर्ज की।
गहलोत ने कहा कि हमने राजस्थान में ‘इंतजारशास्त्र’ सीरीज चला रखी है, जिसके जरिए हम सरकार से सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री से लेकर तमाम मंत्री और अन्य नेता हमारे सवालों का तथ्यात्मक रूप से जवाब नहीं दे पा रहे हैं। अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि हमने वही सवाल उठाए हैं जो जनहित से जुड़े हुए हैं। हमारी सरकार के समय तैयार भावनाओं को अभी तक भी शुरू नहीं किया गया है।
गहलोत ने कहा कि आरजीएचएस योजना का भी यही हाल है। सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं, क्योंकि निजी अस्पतालों का सरकार पर बकाया है और वो अब इलाज से इनकार कर रहे हैं। हमने मेडिकल क्षेत्र में एक से बढ़कर एक योजनाएं दी थी, जिसे इस सरकार ने बर्बाद कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आदर्श सोसाइटी घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की ओर से सरकार को ध्यान दिलाया गया था कि सरकार के वकील ही आरोपियों के वकील बन गए हैं। सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने संजीवनी मामले को लेकर कहा कि हमारी सरकार के समय संजीवनी केस हुआ था, जिसकी 22 महीने तक जांच चली थी। संजीवनी मामले के पीड़ित मेरे पास आकर रोने लगे तब मैं इस मामले में केस डायरी के हिसाब से केंद्रीय मंत्री और उनके परिवार के नाम लिए थे। उसके बाद केंद्रीय मंत्री ने मुझ पर मानहानि का केस किया हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बदली तो उसके बाद 4 महीने में ही जांच पूरी कर ली गई। गहलोत ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि जिस जांच को करने में हमारे समय में 22 महीने में लगे थे, उस जांच को 4 महीने में ही पूरा कर लिया गया।