पंचायत और निकाय चुनावों में दिव्यागों को आरक्षण की मांग उठी

 

हेमंत भाई गोयल के प्रयासों को मिला समर्थन, डॉ. सतीश पूनिया व राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जयपुर। प्रदेश में दिव्यांगजनों को पंचायत राज एवं शहरी निकाय चुनावों में 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की मांग अब और तेज हो गई है। इस संबंध में पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के साथ ही वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस दिशा में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

दोनों नेताओं द्वारा लिखे गए पत्रों में दिव्यांगजनों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया है। पत्रों में उल्लेख किया गया है कि नेशनल चेयरमैन दिव्यांग अधिकार महासंघ हेमंत भाई गोयल लंबे समय से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं और उनके प्रयासों से यह विषय सरकार के संज्ञान में बार-बार लाया जा रहा है।

पत्रों के अनुसार, प्रदेश में करीब 15 लाख से अधिक दिव्यांगजन निवास करते हैं, वहीं देश में यह संख्या कुल आबादी का लगभग 12 प्रतिशत मानी जाती है। ये वर्ग शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा साबित कर चुका है, लेकिन राजनीतिक भागीदारी में अभी भी पीछे है। ऐसे में सरकारी भर्तियों की तर्ज पर स्थानीय निकाय चुनावों में 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना आवश्यक बताया गया है, जिससे उन्हें भी प्रतिनिधित्व मिल सके।

इस मुद्दे का पूर्व में भी इतिहास रहा है। वसुंधरा राजे सरकार के दौरान तत्कालीन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने इस विषय पर सैद्धांतिक सहमति देते हुए प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल में रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसी दौरान चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

हेमंत भाई गोयल ने अपने पक्ष में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 41 के साथ ही दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का हवाला दिया है। इसके अलावा 13 दिसंबर 2006 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित दिव्यांग अधिकारों से जुड़े प्रस्तावों का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने दिव्यांगजनों को समान अवसर और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है।

गौरतलब है कि इस विषय पर वर्ष 2009, 2018 और 2021 में भी सकारात्मक अनुशंसाएं की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक इन्हें लागू नहीं किया गया है। दोनों नेताओं ने अपने पत्रों में इन सिफारिशों का हवाला देते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

बताया जा रहा है कि हेमंत भाई गोयल के लगातार प्रयासों और अब डॉ. पूनिया व राजेंद्र राठौड़ जैसे वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सरकार के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गया है। इससे दिव्यांग समाज में नई उम्मीद जगी है कि उन्हें भी राजनीति में समान भागीदारी का अवसर मिल सकेगा।

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