निकायों तक पहुंचा भाजपा का खरीद-फरोख्त का खेल, पार्षदों को दिए जा रहे 2-2 करोड़ के प्रलोभन: अशोक गहलोत राजस्थान
– मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर में भाजपा बहुमत से दूर
– धनबल और सत्ता की खरीद-फरोख्त से लोकतंत्र पर डाका
– भाजपा नहीं लक्ष्मी जी के मेयर-चेयरमैन बन रहे
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने नगरीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा किए गए अलोकतांत्रिक कृत्यों, धनबल और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर गुरुवार को प्रेस वार्ता की।
गहलोत ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए ‘इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड’ होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन प्रदेश में एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है, पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और मंत्रियों को बिठाकर डेढ़ करोड़, दो करोड़ व ढाई करोड़ रुपये तक के भारी प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देश में भाजपा के पास पैसों की कमी नहीं है। देशभर में निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए धनबल का जो तमाशा किया गया, ‘जैसा देश वैसा भेष’ की तर्ज पर वही प्रेरणा अब नीचे जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग, मनमाना परिसीमन, मुख्यमंत्री के स्वयं के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की मॉनिटरिंग के बावजूद 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निकाय चुनावों में भाजपा की झूठी जीत की बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कारण अब राज्य सरकार पर किसी भी तरह से ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने का भारी दबाव है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के अजमेर, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अलवर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौर के पाली और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में भी भाजपा बहुमत हासिल करने में विफल रही है।
गहलोत ने कहा कि प्रदेशभर में भाजपा और कांग्रेस के वोटों का अंतर मात्र 0.94% (भाजपा 35.19% बनाम कांग्रेस 34.25%) रहा, लेकिन सीटों का फासला 5.5% हो गया । जोधपुर नगर निगम में कांग्रेस को भाजपा से 14,282 वोट ज्यादा मिलने ( कांग्रेस 42.22% बनाम भाजपा 39.41% )के बावजूद गलत परिसीमन के कारण दोनों को बराबर (44-44) सीटें मिलीं। जोधपुर के वार्ड संख्या 99 में कांग्रेस समर्थक चार वार्डों को मिलाकर एक वार्ड बनाया गया, जबकि भाजपा समर्थक क्षेत्रों में एक वार्ड को दो-तीन भागों में बांटा गया। जयपुर में भी कांग्रेस को 14,620 वोट अधिक मिलने के बावजूद परिसीमन में हेरफेर के कारण भाजपा अधिक वार्ड जीत पाई।
चुनाव परिणामों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुल 10,244 वार्डों में से भाजपा 6,065 वार्डों (59%) में चुनाव हारी है। इसके अलावा, प्रदेश के 309 निकायों में से 223 (72%) निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल 4 (भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा, उदयपुर) में ही बहुमत पा सकी, जो कि पिछले चुनाव की तुलना में भी एक निगम कम है।
अशोक गहलोत ने कहा कि हार स्वीकार करने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय से एक आईएएस अधिकारी सीधे कलेक्टर्स और एसडीएम पर दबाव बना रहे हैं। झुंझुनूं (मंडावा), नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस के माध्यम से निर्दलीय व कांग्रेस पार्षदों को डराने-धमकाने, बाड़ेबंदी पर दबिश देने और परिजनों पर दबाव बनाने की घटनाएं सामने आई हैं। खैरथल में निर्वाचित पार्षद विक्रम चौधरी को तोड़कर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा दिल्ली में पार्टी में शामिल कराया जाना यह साबित करता है कि यह तोड़फोड़ अभियान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की देखरेख में चल रहा है।
गहलोत ने कहा कि भाजपा एक-एक पार्षद को 2-2 करोड़ रुपये बांटकर भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। जो लोग करोड़ों रुपये खर्च करके चेयरमैन या मेयर बनेंगे, वे जनता की सेवा करने के बजाय अपनी लागत वसूलने का काम करेंगे, जिससे आम नागरिक की जेब पर सीधा डाका पड़ेगा।