जोधपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को जोधपुर में लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान के तहत पद यात्रा के बाद सभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर व्यंग्य बाण छोड़े तो कई आरोप लगा दिए। इन आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भजन लाल शर्मा से माफी मांगने की मांग कर दी।
जोधपुर में भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पूरे देश में अराजकता फैलाने का काम कर रही है। जहां चुनाव जीतती है वहां ईवीएम सही होता है, जहां हार जाती है वहां गलत हो जाती है। भजनलाल ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता इस तरह की हो गई है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ होता है, तो वह सेना पर सवाल उठाती है। एसआईआर होता है तो चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। इनका जनता से संपर्क टूट गया है। लोकतंत्र से इनका कोई लेना-देना नहीं। कांग्रेस परिवाद की राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रही। देश में परिवारवाद की राजनीति को खत्म करना ही होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर के सरदारपुरा स्थित गोल बिल्डिंग चौराहे पर सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कांग्रेस एक-दो राज्यों में दिख रही है, लेकिन आने वाले समय में नजर नहीं आएगी। सरकार घुसपैठियों को निकालना चाहती है, जबकि कांग्रेस इन्हें बुलाना चाहती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि इनकी जो भाषा है, वह लोकतंत्र में नहीं होती है। यह तिलमिला रहे हैं, इनको सत्ता चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि बांग्लादेश से घुसपैठिए आते रहें, पाकिस्तान से आंतकवाद चलता रहे। कांग्रेस और उसके सहयोगी भारत को अर्थवव्यस्था की पटरी से उतारना चाहते हैं। विपक्ष के लोग चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की बात करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकतंत्र की बात करने वाली कांग्रेस के इतिहास के पन्ने देखे तो उनके राज में जो कुछ हुआ, वह लोकतंत्र की पोल खोलता है। 356 का दुरुपयोग कर कितनी ही विपक्षी सरकारों को बर्खास्त किया। देश में आपातकाल लागू किया, जिसमें नागरिकों के अधिकार हटा लिए गए। कभी सत्ता बचाने के लिए राजनीतिक उठापठक कर रहे हैं संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाना कांग्रेस की राजनीति का नया तरीका बन गया है। न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आखिरकार कांग्रेस किस संस्था को स्वीकार करती है? संस्थाएं तब तक ही अच्छी लगती हैं, जब तक फैसले उनके पक्ष में होते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेस की रैली में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को तो मंच से भाषण देने का मौका दिया गया, लेकिन तीन बार के मुख्यमंत्री को नहीं दिया। कांग्रेस में इनकी नहीं चल रही है। यह दुर्गति हम नहीं कर रहे हैं, आपके कर्म और कांग्रेस इनकी दुर्गति कर रही है। मुझे कहते हैं कि सीएम को भोला समझा था, लेकिन मैं तो विधानसभा में कह चुका हूं कि कोई भी हो, मैं ब्याज सहित चुकाता हूं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं, आप तो जादूगर के बेटे हैं। आपने किसानों को लूटने का काम किया। जब आपकी खाद-बीज की दुकान थी तो किसान को लूटते थे और आज किसानों को लूटने की बात कर रहे हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप नकली खाद-बीज से कमाते थे, आपके भाई के गोदाम पर छापा भी पड़ा। आपके लिए किसान कमाई का जरिया था। मैं ब्रजवासी हूं, कृष्ण की तरह स्पष्ट कहता हूं। इतिहास में किसी मुख्यमंत्री ने अपने डिप्टी सीएम को लेकर जिन शब्दों का प्रयोग आपने किया, वैसा किसी ने नहीं किया है।
भजनलाल शर्मा ने गहलोत के पूर्व ओएसडी को लेकर भी आरोप लगाए और कहा कि आपके पीएसओ को जेल क्यों जाना पड़ा। सीएमओ से सीधे तार जुड़े हुए थे। शशिकांत कौन है ? राजकुमार यादव पीएसओ पेपर लीक गिरोह का संचालन करता था। जोधपुर में अपने रिश्तेदारों को लीज दी, परिवार वालों का ही भला किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी हाथ भ्रष्टाचार करेगा तो उसे काट दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कुछ लोगों के नाम भी लिए और पूछा कि रतनलाल शर्मा, मुफतलाल मुणोत, राजीव अरोड़ा, यह कौन हैं ?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निशाना साधते हुए ‘एक्स’ पर लिखा- आज जोधपुर में माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बिना तथ्यों के जो अनर्गल बातें कही है। उनसे मेरे मन को पीड़ा पहुंची है। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर मेरे बारे में एकदम झूठे आरोप लगाकर जो कपोल-कल्पित कहानी प्रचारित की है, मुझे आशा है कि उसका विस्तृत विवरण, तथ्यों और दस्तावेजों सहित, वे मुझे भी देंगे और प्रदेश की जनता के सामने भी रखें, अन्यथा 24 घंटे में माफी मांगें।
गहलोत ने आगे लिखा कि मैं तो उम्मीद कर रहा था कि लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप वे स्वयं मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे आईएएस शिखर अग्रवाल पर विला खरीद को लेकर मीडिया में सार्वजनिक रूप से लग रहे मिलीभगत के आरोपों और इस प्रकरण में मुख्यमंत्री की संदिग्ध भूमिका को लेकर सच्चाई प्रदेश की जनता को बताएंगे। क्योंकि अनंता कंपनी को विशेष छूट देने का फैसला जिस बोर्ड की बैठक में हुआ, उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि अपराधबोध से ग्रसित होकर मुख्यमंत्री बौखला गए और भाषा की मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ गए। इस प्रकार उन्होंने इन आरोपों से ध्यान भटकाने लिए जनता को भ्रमित करने का असफल प्रयास किया है।
गहलोत ने लिखा
मुख्यमंत्री जी, सवाल अब भी वही है। अनंता रिजॉर्ट को विशेष पैकेज दिए जाने में आपकी क्या भूमिका है, क्योंकि जिस निवेश बोर्ड के निर्णय के आधार पर यह पैकेज जारी हुआ, उसके अध्यक्ष आप ही हैं? और आखिर इस प्रकरण की जांच आप अपने अधीन एजेंसी एसीबी की बजाय केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को क्यों नहीं सौंप रहे? मुख्यमंत्री के अधीन आने वाली एजेंसी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुए बोर्ड के फैसले की निष्पक्ष जांच कैसे कर पाएगी?