प्रदेश में फसलें झुलस रही हैं, किसान बिजली-पानी के लिए तरस रहे हैं और सरकार पार्षदों को डराने-धमकाने व सत्ता के दुरुपयोग में मस्त है : टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की विकट परिस्थितियों और नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के रवैये पर तीखा हमला बोला है।
जूली ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अनेक जिलों में पर्याप्त बारिश न होने से खरीफ की फसलें मुरझाने और झुलसने लगी हैं। किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह बिजली पर निर्भर हैं और निरंतर बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रदेशभर में लंबी-लंबी घोषित-अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। आसन्न सूखे की आहट को लेकर राज्य सरकार बिल्कुल गंभीर नहीं है और किसानों की सुध लेने के बजाय पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में पहली बार ऐसा अभूतपूर्व और चिंताजनक सियासी माहौल देखने को मिल रहा है, जहाँ एक तरफ जनता समस्याओं से जूझ रही है और दूसरी तरफ निकाय चुनावों में करारी शिकस्त व बड़ा झटका मिलने के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर अनैतिक दबाव बना रही है तथा उन्हें अकारण परेशान कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘प्रचंड जीत’ का मैसेज दिए जाने पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या अकारण दबाव बनाने, सत्ता के दुरुपयोग और जनादेश के अपमान को ही पीएम मोदी ‘प्रचंड जीत’ कहते हैं? जनादेश को नकारकर और तिकड़मों से सत्ता हथियाने की कोशिश जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार है। कांग्रेस पार्टी जनता के जनादेश और अपने पार्षदों के साथ मजबूती से खड़ी है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह तो अभी शुरुआत है, आने वाले पंचायत चुनावों और फिर दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की भारी पराजय होने वाली है। भाजपा नेतृत्व इस सच्चाई को भांपकर अभी से डर गया है और इसी बौखलाहट व डर के कारण वह निकाय चुनावों के नतीजों को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा है। यह इनकी पूरी तरह से लोकतंत्र विरोधी मानसिकता है और यह प्रदेश के लिए एक बेहद खतरनाक सोच है।
जूली ने प्रशासनिक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि क्या राज्य के आला अधिकारियों को यह सब खुलेआम होता हुआ दिख नहीं रहा है? किस प्रकार प्रदेश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और जनता के फैसले को चुराने की कोशिशें हो रही हैं। अधिकारियों को समझना होगा कि उनकी जवाबदेही संविधान और जनता के प्रति है, किसी राजनीतिक दल के दबाव में काम करने के लिए नहीं। प्रदेश की जनता सब देख रही है।