कोटा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले कुछ सालों में शिक्षा और कोचिंग कल्चर को लेकर कई बार अपनी राय रखी है। उनका मुख्य फोकस “रटने वाली शिक्षा” और महंगी कोचिंग इंडस्ट्री के दबाव पर रहा है।
राहुल गांधी का तर्क है कि भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था “डर और दबाव” पर चलती है। उनका मानना है कि स्कूल-कॉलेज में बच्चों को मार्क्स और रैंक की दौड़ में धकेल दिया जाता है। इसके बजाय वो “समझ आधारित सीखने” की वकालत करते हैं – जहां बच्चे सवाल पूछें, प्रयोग करें और क्रिटिकल थिंकिंग सीखें।
राहुल गांधी ने चिंता जताते हुए कहा कि NEET, JEE की तैयारी में छात्रों पर असहनीय प्रेशर और आत्महत्याएं बढ़ी हैं। 2023-24 में उन्होंने कोटा की घटनाओं पर ट्वीट कर सरकार से जवाब मांगा। साथ ही लाखों की फीस वाली कोचिंग से गरीब-मिडिल क्लास परिवार पीछे छूट जाते हैं। वो इसे “शिक्षा का बाजारीकरण” कहते हैं।
राहुल गांधी ने अपने भाषणों में “गुणवत्ता वाली सरकारी शिक्षा” पर जोर दिया है। उनका कहना है कि स्कूल-कॉलेज ही इतने मजबूत हों कि बच्चों को बाहर कोचिंग की जरूरत न पड़े। साथ ही स्किल-बेस्ड एजुकेशन, वोकेशनल ट्रेनिंग और रिसर्च पर खर्च बढ़ाने की बात कही है।
राहुल गांधी ने बुधवार रात शहर के दशहरा मैदान में स्टूडेंट से संवाद किया। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हालांकि कोई राजनीतिक बात नहीं हुई। मंच पर राहुल गांधी करीब 1 घंटे तक रहे। उन्होंने कहा कि मैं आज राजनीति की कोई बात नहीं करूंगा, केवल स्टूडेंट की बात करूंगा। इसके बाद राहुल गांधी ने देश के एजुकेशन सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने कहा कि देश का एजुकेशन सिस्टम बच्चों को तनाव देता है, बच्चों को दबाता है, जो देश के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इस एजुकेशन सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ें, ताकि भविष्य में किसी बच्चे को आत्महत्या नहीं करना पड़े।
राहुल गांधी ने कहा कि मैं कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किलोमीटर पैदल चला। लाखों युवाओं से बात हुई. कई सवाल मैंने पूछे थे कि हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ही क्यों बनना चाहता है, जबकि और भी कई करियर के ऑप्शंस मौजूद हैं। राहुल ने कहा कि मैंने कई लड़कियों से बात की थी कि आप में से कितनी लड़कियां पायलट बनना चाहती हैं, लेकिन किसी ने भी हां नहीं की।
उसके बाद मैं उन लड़कियों को पायलट के साथ हेलीकॉप्टर में भेजा और जब वह वापस आई तो उनसे पूछा तो सब ने कहा कि पायलट बनना है। राहुल ने कहा कि हमारा जो सिस्टम है, वो युवाओं के सपने पूरा नहीं करना चाहता है। राहुल ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद मैंने एजुकेशन सिस्टम पर सोचना शुरू किया था कि एजुकेशन सिस्टम में कहां पर कमी है।
राहुल ने अपने भाषण में मृतक आकांक्षा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आकांक्षा ने अपने माता-पिता को पत्र लिखा था। आज वह हमारे बीच में नहीं है, वो डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने नीट का एग्जाम दिया था, पेपर लीक हो गया। उसके पिता पैरालाइज हैं। मैंने उनसे बात की थी, आकांक्षा सिस्टम से हार गई। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मंच पर सौम्या मीना, सानिया गुप्ता, जीशान आलम, हिमांशु डांगी से चर्चा की और पूछा कि तैयारी में कितने पैसे खर्च होते हैं? सब ने बताया कि 4 से 5 लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। राहुल गांधी ने एजुकेशन सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि देश में 3000 बच्चों पर एक आईएएस बनता है। 3000 बच्चों में 30 स्टूडेंट आईआईटी बनते हैं, जबकि 3000 में से 180 डॉक्टर बनते हैं।
राहुल गांधी ने कोचिंग संस्थानों पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि बच्चों से फीस के नाम पर मोटा पैसा लिया जाता है। कई बच्चे लोन लेकर पढ़ाई करते हैं। नीट में 22 लाख बच्चे बैठे थे। उनसे फीस के नाम पर 1.32 लाख करोड़ रुपए हर साल फीस के नाम पर लिए जाते हैं, जितना पैसा नीट परीक्षार्थियों के बच्चों से लिया जाता है, उतना पैसा केंद्र सरकार अपने एजुकेशन बजट पर खर्च करती है। राहुल गांधी ने कहा कि पांच परीक्षाओं पर जितना पैसा फीस के नाम पर लिया जाता है, उतना पैसा 5 मंत्रालयों का बजट होता है।
राहुल गांधी ने मंच पर एक विद्यार्थी के पेरेंट्स से भी बात की। पैरंट्स ने कहा कि बच्चे तैयारी करते हैं, लेकिन जिस तरह से पेपर लीक हो रहे हैं, उस बच्चे तनाव और प्रेशर में रहते हैं। तब डर लगता है कि बच्चे गलत कदम नहीं उठा लें। इसलिए कई बार उनके कमरे में जाकर चेक करते हैं। सरकार से भी निवेदन है कि इस समस्या का कोई ना कोई समाधान जरूर निकाले। राहुल गांधी ने कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम पैसा खींचने की मशीन है। सरकारी स्कूलों की हालत अच्छी नहीं है। प्राइवेट स्कूल महंगे हैं, उसके बाद बच्चे ट्यूशन लेते हैं एग्जाम फीस देते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में रोजगार सिस्टम भी पूरी तरीके से फेल है। 1000 में से 12 बच्चों को रोजगार मिलता है। करीब 38 लोगों को परमानेंट जॉब मिलता है. बाकी लोग बेरोजगार रहते हैं या तो वो गिग वर्कर्स बनाकर उबर बाइक चलाते हैं या फिर मनरेगा या कुली का काम करेंगे। राहुल ने कहा कि देश में शिक्षा का सिस्टम नहीं बल्कि शोषण का सिस्टम चल रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि देश में यही स्थिति इंजीनियर की भी है. 100 में से 80 इंजीनियर बेरोजगार है।
राहुल गांधी ने कहा कि मैंने आज राजनीतिक बात नहीं की है। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमको इस सिस्टम को बदलना होगा। सिस्टम को ठीक करना होगा। शिक्षा के सिस्टम का मतलब होता है कि वो आपके सपने पूरा करें और उसे पूरा करने का काम देश के एजुकेशन सिस्टम का होना चाहिए। वह भी आपकी जेब से लाखों रुपए निकाले बिना होना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि मैं आपके विचार जानने आया हूं।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत तमाम नेताओं को ग्राउंड में सबसे पीछे बैठाया गया था। वहीं कार्यक्रम में किसी भी नेता को मंच पर जगह नहीं दी गई थी। मंच पर केवल राहुल गांधी ही मौजूद रहे। राहुल गांधी के मंच पर आने से पहले लाइव कंसर्ट का भी कार्यक्रम हुआ जिसमें रैपर ने अपने गीतों के जरिए युवाओं को रोमांचित किया। करीब डेढ़ घंटे तक मंच पर रैपर अपने गानों की प्रस्तुति दी।