मुंबई। ईरान-इजराइल युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। इधर भारतीय रुपए की हालत भी पतली होती जा रही है।
सोमवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 2100 अंक टूटकर 76,800 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 700 अंक गिरकर 23,800 पर कारोबार करता दिखा। बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर लाल निशान में थे. यानी लगभग पूरा बाजार दबाव में था और निवेशक तेजी से अपने शेयर बेचते नजर आए,लेकिन सवाल है कि अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता युद्ध का खतरा। जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ते ही दुनिया भर के निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं और सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं. इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ता है। इस युद्ध का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 25 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 116 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है.इसी बीच रुपये पर भी दबाव बढ़ गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92 रुपये 28 पैसे के स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। भारत ही नहीं, एशिया के कई बड़े बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 7 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। वहीं अमेरिका के बाजारों में भी गिरावट का दौर जारी है. डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 जैसे प्रमुख इंडेक्स पिछले कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए।
यानी साफ है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो इसका असर आने वाले दिनों में महंगाई, तेल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।