जयपुर। जयपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए शनिवार को चार प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए। बीजेपी की ओर से पहले से चर्चा में आए सुनील कोठारी और कांग्रेस की ओर से अंतिम समय में सुनीता मावर को उम्मीदवार बनाया हैं। हालांकि कांग्रेस की ही सुनीता मैठी और निर्दलीय पार्षद दशरथ अटल ने भी चुनावी मैदान में ताल ठोकी है। बीजेपी जहां अपने पार्षदों की एकजुटता और 10 निर्दलीयों के समर्थन के साथ जीत का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस ने भी 20 भाजपा पार्षदों के संपर्क में होने का दावा किया है।
बीजेपी की ओर से महापौर पद के प्रत्याशी घोषित किए गए सुनील कोठारी ने शनिवार को नगर निगम मुख्यालय में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान अन्य दावेदार शैलेंद्र भार्गव, पुनीत कर्णावट और विमल अग्रवाल भी उनके साथ मौजूद रहे। इन नेताओं की मौजूदगी के जरिए बीजेपी ने पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। पार्टी ने कहा कि महापौर पद के लिए सुनील कोठारी के नाम पर सभी प्रमुख दावेदार और पार्षद एक साथ हैं। नामांकन के दौरान नगरीय निकाय चुनाव में जयपुर संभाग प्रभारी श्रवण सिंह बगड़ी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ, बालमुकुंद आचार्य सहित बीजेपी के कई पदाधिकारी मौजूद थे।
जयपुर नगर निगम में महापौर चुनाव के दौरान बीजेपी 2019 में क्रॉस वोटिंग का सामना कर चुकी है। उस वक्त बहुमत होने के बावजूद बीजेपी के मनोज भारद्वाज को हार का सामना करना पड़ा था और क्रॉस वोटिंग के चलते विष्णु लाटा महापौर चुने गए थे। इसलिए इस बार बीजेपी ने प्रत्याशी चयन से लेकर नामांकन तक सावधानी बरतने की रणनीति अपनाई है। महापौर पद की दावेदारी कर रहे प्रमुख चेहरों को साथ लेकर सुनील कोठारी का नामांकन दाखिल कराना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि 2019 की तरह इस बार क्रॉस वोटिंग की स्थिति न बने और सभी बीजेपी पार्षद एकजुट होकर मतदान करें।
नामांकन के बाद सुनील कोठारी ने केंद्र,राज्य और जयपुर शहर बीजेपी के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जयपुर के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। वे प्रधानमंत्री के विजन और योजनाओं को प्रत्येक घर, जन और मन तक पहुंचाने के साथ संगठन और शहर को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे। कोठारी ने कहा कि राजा जयसिंह ने जिस गौरवपूर्ण जयपुर की स्थापना की थी, उसके वैभव और गौरव को फिर से स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होगी। शहर की सफाई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका पर उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन मिलेगा। कोठारी ने दावा किया कि उन्हें बीजेपी पार्षदों की संख्या से भी ज्यादा वोट मिलेंगे।
इस दौरान बीजेपी से मेयर पद के प्रबल दावेदार पुनीत कर्णावट ने कहा कि सुनील कोठारी सभी पार्षदों में वरिष्ठ हैं और सर्वसम्मति से उनका नाम चुना गया है। उनके पास अनुभव है और जयपुर से उनका गहरा लगाव है। कर्णावट ने विश्वास जताया कि कोठारी के नेतृत्व में जयपुर तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के 78 वोट के साथ निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन है और उनके पास कुल 90 वोट हैं। कर्णावट ने कहा कि इस बार क्रॉस वोटिंग की कोई गुंजाइश नहीं है और सुनील कोठारी 90 से 95 वोट के साथ महापौर का चुनाव जीतेंगे। इस दौरान विमल अग्रवाल भी इस बार मेयर पद के दावेदार थे। नॉमिनेशन के वक्त उन्होंने कहा कि सुनील कोठारी का नाम सर्वसम्मति से सामने आया है। पार्टी के सभी पार्षद उनके नेतृत्व में जयपुर को विकसित और सर्वश्रेष्ठ शहर बनाने के लिए काम करेंगे। अग्रवाल ने भी क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार करते हुए पूर्ण बहुमत से बीजेपी का महापौर चुने जाने का दावा किया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भी महापौर चुनाव में जीत का दावा करते हुए शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि पार्टी ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है और इस बार आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में जाने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के 20 पार्षद कांग्रेस के संपर्क में हैं और 25 सितंबर को नतीजे चौंकाने वाले होंगे। शर्मा ने बीजेपी की बाड़ाबंदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर नहीं है तो पार्षदों की बाड़ाबंदी क्यों की गई है? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस बहुमत के साथ महापौर बनाने जा रही है।कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मावर ने कहा कि वे आंकड़ों के खेल में नहीं उलझना चाहतीं। उनका कहना है कि चुनाव जीतकर आए सभी जनप्रतिनिधि जनसंपर्क के दौरान शहर की गलियों और मोहल्लों तक पहुंचे हैं। ऐसे में उन्हें जयपुर की जमीनी समस्याओं की जानकारी है। मावर ने शहर की सफाई व्यवस्था, कचरे के ढेर, आवारा पशुओं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जयपुर को विश्व विरासत शहर के रूप में मिले दर्जे और उसकी पहचान को बनाए रखने के लिए शहर की व्यवस्थाओं में सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह खुद वर्ष 2004 से लगातार पार्षद हैं और शहर की समस्याओं से वाकिफ हैं। मावर ने दावा किया कि जो जनप्रतिनिधि जयपुर की दशा सुधारना चाहते हैं, वे उन्हें वोट देंगे।