पूरी। भारी बरसात और भारी भीड़ के बीच में पुरी की रथ यात्रा में अचानक भगदड़ मच गई। इस भगदड़ के चलते बेहोश होने के बाद दो व्यक्तियों की मौत हो गई। कई लोग घायल हो गए। इस कारण जब यात्रा को रोकना पड़ा। अब रथ यात्रा कल फिर से शुरू होगी।
जगन्नाथ रथ यात्रा के पहले दिन ग्रैंड रोड पर भक्तों की भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। भीड़ के कारण बेहोश होने से दो लोगों की मौत हो गई। 150 से ज्यादा घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
सबसे पहले भगदड़ के चलते बेहोश हुए व्यक्ति को इलाज के लिए पुरी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत का सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने कहा कि मरने वाले की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। आगे की जांच चल रही है।
भगदड़ के दौरान एक और शख्स की मौत की खबर है। हालांकि, अधिकारियों ने भी तक दूसरी मौत की पुष्टि नहीं की है। एक और व्यक्ति की भी मौत होने की खबर है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक दूसरी मौत की पुष्टि नहीं की है।
एक्स पोस्ट, ओडिशा पुलिस ने कहा कि, ओडिशा अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (SRU) ने आज सुबह से भारी भीड़ से 33 भक्तों को सुरक्षित बचाया है। बचाए गए भक्तों को तुरंत प्राथिमिक उपचार और ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जिसके बाद उन्हें आगे की उपचार के लिए पास के अस्पताल में ले जाया गया।
इसके अलावा गुरुवार शाम तक रथ यात्रा के दौरान सेहत से जुड़ी अलग-अलग शिकायतों के चलते करीब 150 लोगों को पुरी जिला जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
भगदड़ के बीच इमरजेंसी रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों को स्ट्रेचर पर निकाला। सालाना रथ यात्रा के लिए पुरी जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई थी। सुरक्षाकर्मियों और इमरजेंसी रेस्क्यू टीमों ने भीड़ से परेशान लोगों की मदद के लिए तुरंत दखल दिया और पवित्र रथों के आसपास लोगों की भारी भीड़ बढ़ने पर उन्हें मेडिकल मदद दी।
ओडिशा के पुरी में 9 दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। ‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।
सबसे पहले घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच चक्रराज सुदर्शन को मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा शून्य पहंडी (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया। अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया।