फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों को निकालने की अपील

नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑल इंडिया सीफरर्स यूनियन’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार सुबह संसद में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के साथ पश्चिम एशिया के संघर्ष से उत्पन्न हो रही स्थिति पर चर्चा की।

‘ऑल इंडिया सीफरर्स यूनियन’ ने कहा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक वर्तमान में ईरान और फारस की खाड़ी के बेहद खतरनाक इलाकों में फंसे हुए हैं। यूनियन के अनुसार, बंदर अब्बास, बीआईके ईरान, सिरी द्वीप और आसपास के बंदरगाहों पर मौजूद कई जहाजों से संपर्क ठीक से नहीं हो पा रहा है और वहां जरूरी सामानों की कमी होने लगी है।

यूनियन के अध्यक्ष संजय वी. पवार ने बताया कि 9 मार्च 2026 तक लगभग 1,100 भारतीय नाविक, जो 37 से 38 भारतीय झंडे वाले जहाजों पर सवार हैं, फारस की खाड़ी और आसपास के जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। “कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मिडल ईस्ट में लगभग 23,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इन 23,000 भारतीय नाविकों का एक बड़ा हिस्सा विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात है, जो वर्तमान में भारी जोखिम का सामना कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के नाविकों के परिवारों ने भी सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है। पवार ने कहा कि पूरे भारत से परिवार भावुक अपील कर रहे हैं और अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, जो बिना किसी उचित संचार व्यवस्था, भोजन आपूर्ति या सुरक्षा आश्वासन के वहां फंसे हुए हैं।
पवार ने बताया कि बंदर अब्बास, बीआईके ईरान, सिरी द्वीप और आसपास के बंदरगाहों पर मौजूद कई जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा मंडरा रहा है। प्रतिबंधों के कारण नाविकों का वेतन रुक गया है और वे भारी डर और मानसिक तनाव में हैं। भारतीय क्रू द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी सुरक्षित निकासी के लिए ‘एसओएस’ वीडियो पोस्ट कर मदद की गुहार लगाई है।

पवार ने इस बात पर जोर दिया कि ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ (युद्ध जोखिम बीमा) कवरेज की कमी, कई ‘प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी’ क्लबों द्वारा हालिया तनाव के बाद सहायता देने से इनकार करना, और मिसाइल व ड्रोन हमलों या अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के डर से पैदा हुआ भारी मानसिक तनाव इस समय चिंता के मुख्य कारण हैं।

पवार ने कहा, “ऐसी खबरें मिल रही हैं कि पोर्ट की पाबंदियों या कंपनियों के दबाव के कारण कुछ चालक दल के सदस्यों को जहाज पर ही रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनके परिवारों को जान जाने का डर सता रहा है, जैसा कि हालिया खबरों में भी दिखा है कि भारतीय क्रू युद्ध क्षेत्रों के बेहद करीब हैं। इन गंभीर हालातों को देखते हुए, हम प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कार्रवाई और हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं।”

यह बताते हुए कि पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय भारतीय झंडे वाले जहाजों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग कर रहा है और समुद्री स्थितियों की समीक्षा कर रहा है, पवार ने कहा, “नाविकों और उनके परिवारों को तत्काल सहायता और समन्वय प्रदान करने के लिए एक समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया टीम काम कर रही है.” डीजीएस ने इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षा बढ़ाने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने और 24×7 आपातकालीन संपर्क नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया के 12 प्रतिशत नाविक प्रदान करता है और वैश्विक समुद्री उद्योग को सबसे अधिक नाविकों की आपूर्ति करने वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है।

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